पद्मश्री सम्मानित डी. वाई. पाटिल का 90 साल की उम्र में निधन, रहे थे 3 राज्यों के राज्यपाल, शिक्षा और स्वास्थ्य में काम

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बिहार, त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे पद्मश्री डा. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल का सोमवार को निधन हो गया। वे 90 साल के थे। जानकारी के अनुसार सास संबंधी बीमारी व उम्र दराज होने के चलते उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।

Dr D Y Patil Passed Away

Dr D Y Patil Passed Away : एजुकेश्निस्ट, समाजसेवी और बिहार, त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे पद्मश्री डा. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल का सोमवार को निधन हो गया। वे 90 साल के थे। जानकारी के अनुसार सास संबंधी बीमारी व उम्र दराज होने के चलते उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।

22 अक्टूबर 1935 को जन्मे डॉ. पाटिल ने अपना पूरा जीवन शिक्षा के प्रसार और जनसेवा में समर्पित किया। उन्होंने मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और कृषि जैसे क्षेत्रों में संस्थानों का एक विशाल नेटवर्क खड़ा कर व्यावसायिक शिक्षा को हर वर्ग तक पहुँचाने में बेहद अहम भूमिका निभाई। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

बता दें, कल बुधवार सुबह 11 बजे उनका अंतिम शव यात्रा निकाली जाएगी। वहीं 11 बजे से शाम 4 बजे तक उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे कसबा बावड़ा स्थित ‘यशवंत निवास’ से उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में काम

डॉ. पाटिल द्वारा स्थापित ‘डी. वाई. पाटिल ग्रुप’ देश के सबसे बड़े निजी शैक्षणिक नेटवर्क में से एक है। इस समूह के अंतर्गत 182 से अधिक शिक्षण संस्थान, सात डीम्ड यूनिवर्सिटीज, इंटरनेशनल स्कूल्स और मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल संचालित होते हैं।

बीते दशकों में उनके इन संस्थानों से लाखों छात्रों ने पढ़ाई पूरी की है और देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। विशेष रूप से महाराष्ट्र में उन्होंने उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई ऊंचाई दी।

राजनीतिक जीवन और राष्ट्रीय सम्मान

शिक्षा के अलावा डॉ. डी. वाई. पाटिल का राजनीतिक करियर भी काफी उल्लेखनीय रहा। वे महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य (MLA) चुने गए थे। उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य के रूप में कांग्रेस के नेतृत्व में कार्य किया और राज्य मंत्रिमंडल में भी जिम्मेदारी निभाई।

इसके बाद उन्होंने त्रिपुरा, बिहार और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दीं। अपनी प्रशासनिक कुशलता और जनता से जुड़ाव के लिए वे हमेशा सराहे गए।

शिक्षा और समाज कल्याण के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 1991 में उन्हें ‘पद्मश्री’ (Padma Shri) पुरस्कार से सम्मानित किया था।

डॉ. पाटिल अपने पीछे एक विशाल संस्थागत विरासत और भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। देश के शिक्षाविद, डॉक्टर और छात्र हमेशा उनके बनाए मार्ग और संस्थानों से प्रेरणा लेते रहेंगे।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।