भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की फिटनेस को लेकर इन दिनों एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। घुटने में दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव की वजह से बुमराह श्रीलंका के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह टीम में आकिब नबी को शामिल किया गया है। इस पूरे मामले के बाद सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) की स्पोर्ट्स साइंस और मेडिकल टीम के साथ सेलेक्टर्स के बीच तालमेल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बुमराह की फिटनेस रिपोर्ट पर सवाल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अधिकारियों, वीवीएस लक्ष्मण और मुख्य सेलेक्टर अजीत अगरकर के बीच एक ऑनलाइन बैठक हुई। इस बैठक में सेंट्रल कॉन्ट्रेक्ट वाले खिलाड़ियों की चोटों और उनके रिहैबिलिटेशन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि सेलेक्शन कमिटी को पहले जानकारी दी गई थी कि जसप्रीत बुमराह श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए फिट हैं। हालांकि, बाद में मेडिकल टीम की रिपोर्ट में उनकी चोट को गंभीर बताया गया, जिसके चलते उन्हें सीरीज से बाहर करने का फैसला लिया गया।
स्पोर्ट्स साइंस डिपार्टमेंट में लीडरशिप की कमी

इस मामले के सामने आने के बाद बीसीसीआई की स्पोर्ट्स साइंस व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल नितिन पटेल को पद से हटाए जाने के बाद से हेड ऑफ स्पोर्ट्स साइंस का पद खाली पड़ा हुआ है। माना जा रहा है कि डिपार्टमेंट में पर्मानेंट लीडरशिप की कमी का असर खिलाड़ियों की चोटों के सही आकलन और मैनेजमेंट पर पड़ सकता है।
Interim Head से मांगा जा सकता है जवाब

फिलहाल स्पोर्ट्स साइंस डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे धनंजय कौशिक से इस मामले को लेकर सवाल किए जाने की पॉसीबिलिटी है। हालांकि उनकी एबिलिटी पर कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा, लेकिन बुमराह की चोट को लेकर सही समय पर आकलन और मैनेजमेंट क्यों नहीं हो पाया, इस पर जवाब मांगा जा सकता है।
Question On Fitness Management: पहले भी फिटनेस को लेकर उठे थे सवाल

भारतीय टीम में फिटनेस मैनेजमेंट को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले तेज गेंदबाज हर्षित राणा की फिटनेस को लेकर भी सवाल उठे थे। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि वजन बढ़ने के बावजूद उन्हें खेलने के लिए फिट घोषित किया गया, जिसके बाद उन्हें हैमस्ट्रिंग की समस्या का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं के बाद भारतीय खिलाड़ियों की फिटनेस निगरानी और चोट मैनेजमेंट सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत पर बहस शुरू हो गई है।



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