India Russia RELOS Agreement: भारत और रूस के बीच हाल ही में एक अहम सैन्य समझौता लागू हुआ है, जिसे RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Agreement) कहा जाता है। यह समझौता फरवरी 2025 में साइन किया गया था और जनवरी 2026 से प्रभावी हो चुका है। इस डील के तहत दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल कर सकते हैं और तय सीमा तक सैनिकों व सैन्य संसाधनों की तैनाती कर सकते हैं।
RELOS एक लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज एग्रीमेंट है, जिसका मतलब है कि भारत और रूस एक-दूसरे को सैन्य सपोर्ट सुविधाएं देंगे। इसमें ईंधन, मरम्मत, भोजन, ट्रांसपोर्ट और अन्य जरूरी संसाधन शामिल हैं। इस समझौते के तहत दोनों देश अपने सैनिकों, जहाजों और एयरक्राफ्ट को दूसरे देश के बेस पर रख सकते हैं। इसका उद्देश्य युद्ध नहीं, बल्कि सहयोग बढ़ाना और सैन्य गतिविधियों को आसान बनाना है।
India Russia RELOS Agreement: तैनाती से जुड़े नियम

इस समझौते में तैनाती की एक तय सीमा रखी गई है ताकि संतुलन बना रहे। इसके अनुसार:
- अधिकतम 3000 सैनिक एक समय में तैनात किए जा सकते हैं।
- 10 एयरक्राफ्ट (फाइटर या ट्रांसपोर्ट) की अनुमति है।
- 5 युद्धपोत (Warships) एक साथ तैनात हो सकते हैं।
- इन सभी को मेजबान देश द्वारा पूरी लॉजिस्टिक सहायता दी जाएगी, जिससे संचालन में आसानी होगी।
समझौते का उद्देश्य
RELOS का मुख्य उद्देश्य सैन्य सहयोग को मजबूत करना है। इसके जरिए:
- संयुक्त सैन्य अभ्यास आसान होंगे।
- आपदा राहत और मानवीय सहायता में तेजी आएगी।
- सैन्य संचालन की लागत कम होगी।
- दोनों देशों के बीच समन्वय बेहतर होगा।
- यह समझौता शांति और सहयोग पर आधारित है, न कि आक्रामक सैन्य गतिविधियों पर।
India-Russia Cooperation: भारत और रूस के बीच संबंध

भारत पहले भी इस तरह के समझौते कर चुका है। उदाहरण के तौर पर अमेरिका के साथ LEMOA (Logistics Exchange Memorandum of Agreement) किया गया था। अब रूस के साथ RELOS होने से भारत की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हो गई है। भारत और रूस के रिश्ते बहुत पुराने और मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच 70 साल से ज्यादा समय से रक्षा सहयोग चलता आ रहा है। भारत अपनी सैन्य जरूरतों के लिए काफी हद तक रूस पर निर्भर रहा है। लड़ाकू विमान, टैंक और मिसाइल सिस्टम जैसे कई बड़े हथियार रूस से ही खरीदे जाते हैं। इस समझौते से यह साझेदारी और गहरी हो जाएगी।
आज दुनिया की राजनीतिक और सैन्य स्थिति तेजी से बदल रही है। चीन के साथ भारत का सीमा तनाव, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध और अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा। इन परिस्थितियों में देशों के लिए मजबूत साझेदारी जरूरी हो गई है। RELOS इसी दिशा में एक अहम कदम है।
रूस और भारत को क्या-क्या होगा फायदा?
इस समझौते से भारत को कई रणनीतिक फायदे मिलेंगे। रूस के आर्कटिक और फार ईस्ट क्षेत्रों तक पहुंच, ठंडे इलाकों में सैन्य प्रशिक्षण का मौका और लंबी दूरी के मिशन में सपोर्ट। इसके साथ ही संयुक्त अभ्यासों में आसानी आएगी। इसके अलावा, भारतीय नौसेना को रूस के उत्तरी क्षेत्रों में ऑपरेशन करने का अवसर भी मिल सकता है।
दूसरी और रूस के लिए भी यह समझौता काफी महत्वपूर्ण है। भारतीय महासागर क्षेत्र में पहुंच बढ़ेगी। इसके साथ ही भारतीय बंदरगाहों का उपयोग कर सकेगा। एशिया में रणनीतिक मौजूदगी मजबूत कर सकेगा। वहीं सैन्य और मानवीय मिशनों में तेजी आएगी। इससे रूस की वैश्विक सैन्य क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।
India-Russia Cooperation: आपदा राहत और मानवीय मदद

RELOS सिर्फ सैन्य उपयोग तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग आपदा राहत के लिए भी किया जा सकता है। अगर किसी देश में बाढ़, भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदा आती है, तो दूसरा देश तेजी से मदद पहुंचा सकता है। इससे राहत कार्यों की गति और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। बता दें कि भारत और रूस पहले से ही INDRA जैसे संयुक्त अभ्यास करते हैं। इस समझौते के बाद, अभ्यास ज्यादा बार हो सकेंगे, लागत कम होगी। और लॉजिस्टिक्स आसान होगा।
वहीं सैनिकों को बेहतर अनुभव मिलेगा। यह दोनों सेनाओं की तैयारी को और मजबूत करेगा। यह समझौता 5 साल के लिए लागू है। अगर दोनों देश चाहें तो इसे आगे 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। आने वाले समय में इस समझौते के तहत, ज्यादा संयुक्त ऑपरेशन हो सकते हैं। नई सैन्य रणनीतियां विकसित होंगी वहीं सहयोग के नए क्षेत्र खुलेंगे।




















