Robotic Cockroach Technology: टेक्नोलॉजी इतना ज्यादा एडवांस हो गया है कि कई बार ऐसी चीजें सामने आती हैं, जो किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसी लगती हैं। अब युद्ध सिर्फ मोर्चों पर नहीं लड़े जाते। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग हो, यूक्रेन-रूस का युद्ध हो या फिर भारत का ऑपरेशन सिन्दूर हो, हर कहीं ड्रोन का इस्तेमाल होता है। लेकिन अब युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल पुराना होने जा रहा है। जर्मनी ने एक ऐसी नई तकनीक खोज निकाली है, जो सुनने में फिल्मों की कहानी जैसी है। इस नई टेक्नोलॉजी में कॉकरोच को ही रोबोट में बदल दिया जाएगा, ये दुश्मन के इलाके में जाकर जासूसी समेत सारे जरूरी काम करेंगे।
कैसे काम करेंगे रोबोटिक कॉकरोच?
जर्मनी की स्टार्टअप कंपनी SWARM Biotactics ने ऐसी टेक्नोलॉजी डेवलप की है, जिसमें असली कॉकरोच के ऊपर छोटे-छोटे बैकपैक लगाए जाएंगे। इनमें कैमरा, सेंसर, और कम्युनिकेशन के लिए जरूरी सिस्टम होते हैं, जिसकी वजह से कॉकरोच रियल-टाइम जानकारी जुटा सकेंगे और दुश्मन के इलाके की जानकारी अपने कंट्रोलर तक भेज सकेंगे। यह खासतौर पर उन जगहों के लिए बनाई जा रही है जहां इंसान, ड्रोन या पारंपरिक रोबोट नहीं पहुंच पाते, जैसे- ढही हुई इमारतें, संकरी सुरंगें या युद्ध क्षेत्र। इन जगहों पर छोटे-छोटे रोबोटिक कॉकरोच घुसकर जानकारी जुटा सकेंगे।
कॉकरोच ही क्यों चुने गए?
वैज्ञानिकों के अनुसार, कॉकरोच को सबसे मजबूत और टिकाऊ जीवों में से एक माना जाता है। यह किसी भी परिस्थिति में रह और एकदम संकरी से संकरी जगहों में घुस सकता है। यही वजह है कि ऐसे मिशन के लिए कॉकरोच को आइडियल माना जा रहा है। यह ऐसी जगन और सुरंग में भी पहुंच सकेंगे, जहां ड्रोन, सैनिक या ट्रेडिशनल रोबोट नहीं पहुंच पाते।
युद्ध ही नहीं, प्राकृतिक आपदाओं में भी आएंगे काम
इन कॉकरोच को न सिर्फ सैन्य जासूसी के लिए, बल्कि अन्य कामों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए भूकंप और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से हुई दुर्घटना के बाद ढही हुई इमारतों में फंसे लोगों को ढूंढने के लिए भी इन रोबोटिक कॉकरोच को भेजा जा सकता है। इससे ये राहत और बचाव दलों का काम आसान कर सकते हैं।
इनकी मदद से ऐसे इलाकों में भी सेंसर पहुंचाए जा सकते हैं जहां इंसानों के लिए जाना खतरनाक हो। दुनिया भर में अब युद्ध की रणनीति तेजी से बदल रही है। अब ड्रोन, AI और रोबोट युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं।




















