‘अंतिम फैसला आने तक नहीं होगी गिरफ्तारी…’, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को HC से मिली अंतरिम जमानत

Swami Avimukteshwaranand Controversy (image: social media )

Swami Avimukteshwaranand Controversy: इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर बड़ा अपडेट सामने आया है।  दरअसल कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट किया कि अंतिम आदेश जारी होने तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। साथ ही कोर्ट ने उन्हें जांच एजेंसियों के साथ पूरी तरह सहयोग करने का निर्देश भी दिया है। नीचे इस पूरे मामले को आसान भाषा में विस्तार से समझिए।

Swami Avimukteshwaranand Controversy: हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

Swami Avimukteshwaranand Controversy (image: social media )
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अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और तथ्यों का गहराई से अध्ययन करना जरूरी है, इसलिए तुरंत फैसला सुनाना उचित नहीं होगा।

इसी वजह से कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। जज ने यह भी कहा कि अदालत अनावश्यक देरी नहीं करेगी और जल्द से जल्द निर्णय सुनाने की कोशिश की जाएगी। संकेत दिए गए हैं कि मार्च के तीसरे सप्ताह तक इस मामले में अंतिम आदेश जारी किया जा सकता है।

HC on Swami Avimukteshwaranand Case: गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक

Swami Avimukteshwaranand Controversy (image: social media )
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सुनवाई के दौरान अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत देते हुए कहा कि जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने यह शर्त भी लगाई कि वह जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे और जांच एजेंसियों के बुलाने पर उपस्थित होंगे। अदालत का यह आदेश अंतरिम सुरक्षा के रूप में माना जा रहा है, जिससे आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक राहत मिलती है।

Swami Avimukteshawaranand Arrest: पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज है मामला

यह पूरा मामला नाबालिगों के साथ कथित यौन शोषण से जुड़ा है। इस संबंध में दर्ज एफआईआर में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके एक शिष्य ने संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी। पॉक्सो एक्ट के मामलों को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है, इसलिए अदालत ऐसे मामलों में सभी तथ्यों की सावधानीपूर्वक जांच करती है।

लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश

Swami Avimukteshwaranand Controversy (image: social media )
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सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों, याचिकाकर्ता और राज्य सरकार को अपनी लिखित दलीलें जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया। कोर्ट का कहना था कि लिखित तर्कों के आधार पर मामले की कानूनी स्थिति को और स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा। इस प्रक्रिया के बाद ही अदालत अंतिम निर्णय पर पहुंचेगी।

आरोपों को बताया साजिश

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत और निराधार बताया है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक या सत्ता से जुड़ी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने अदालत में दावा किया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है।

अंतिम फैसले पर टिकी निगाहें

अब इस मामले में सभी की नजर इलाहाबाद हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर बनी हुई है। अदालत का निर्णय यह तय करेगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत मिलेगी या आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी। मार्च के तीसरे सप्ताह में संभावित फैसले के साथ ही इस हाई-प्रोफाइल मामले में अगला महत्वपूर्ण मोड़ आने की उम्मीद है।

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