Vishnu Deo Sai Chhattisgarh environment Success : छत्तीसगढ़ के लिए यह अत्यंत गौरव और सम्मान का क्षण रहा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 133वें एपिसोड में राज्य के बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरणों के सफल संरक्षण प्रयासों का विशेष उल्लेख करते हुए इसकी सराहना की।
प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय मंच से की गई यह प्रशंसा न केवल छत्तीसगढ़ की पर्यावरणीय उपलब्धियों को नई पहचान देती है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण में जुटे अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय समुदायों के उत्साह को भी नई ऊर्जा प्रदान करती है।
सीएम विष्णु देव साय ने कहा –
राजधानी रायपुर के भाटागांव स्थित विनायक सिटी में ‘मन की बात’ कार्यक्रम का श्रवण करने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ के प्रयासों का उल्लेख यह दर्शाता है कि राज्य अब विकास के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रहा है।
बारनवापारा वाइल्डलाइफ सेंचुरी लगभग 245 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और आज वन्यजीव संरक्षण की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरा है। एक समय ऐसा था जब यह क्षेत्र अपने प्रमुख वन्यजीव काले हिरण से लगभग खाली हो चुका था।
हालात बदलने हुए शुरू

1970 के दशक के बाद अतिक्रमण, प्राकृतिक आवास के क्षरण और मानवीय दबाव के कारण काले हिरण यहां से लगभग समाप्त हो गए थे। करीब पांच दशकों तक यह प्रजाति इस क्षेत्र में स्थानीय रूप से विलुप्त रही। लेकिन वर्ष 2018 में राज्य वन्यजीव बोर्ड की नौवीं बैठक में पुनर्स्थापन योजना को स्वीकृति मिलने के बाद हालात बदलने शुरू हुए। वैज्ञानिक प्रबंधन, योजनाबद्ध पुनर्वास, सतत निगरानी और बेहतर संरक्षण रणनीति के साथ काले हिरणों को फिर से बसाने का अभियान शुरू किया गया।
शुरुआती दौर में कई चुनौतियां सामने आईं। निमोनिया के कारण कुछ हिरणों की मृत्यु भी हुई, लेकिन वन विभाग ने त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए। बाड़ों में रेत की मजबूत सतह बनाई गई, जल निकासी व्यवस्था विकसित की गई, अपशिष्ट प्रबंधन सुधारा गया और विशेषज्ञ पशु चिकित्सक की नियुक्ति की गई।
200 काले हिरण
इन निरंतर प्रयासों का परिणाम आज सभी के सामने है। बारनवापारा के खुले घास के मैदानों में अब लगभग 200 काले हिरण (ब्लैकबक) सुरक्षित और सक्रिय रूप से विचरण कर रहे हैं। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सतत प्रयास हों, तो किसी भी विलुप्तप्राय प्रजाति को उसके प्राकृतिक आवास में दोबारा स्थापित किया जा सकता है।
जो क्षेत्र कभी सूना और शांत हो गया था, वही आज जीवन, जैव विविधता और संरक्षण की नई कहानी लिख रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में इस सफलता का उल्लेख बारनवापारा अभयारण्य को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला क्षण साबित हुआ है।
छत्तीसगढ़ की यह सफलता केवल वन्यजीव संरक्षण की उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रकृति और विकास के संतुलन का सशक्त संदेश भी है। आने वाले समय में यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।























