देश में कोरोना से संक्रमित मामलों में उछाल देखने को मिला है, अभी पूरी तरह से महामारी का खतरा टला नहीं हैं। कोरोना से जारी इस जंग के बीच भारत में टीकाकरण अभियान को सफलता से चलाया जा रहा है, देश में अब 6 से 12 साल के बच्चों के लिए भी वैक्सीन के इस्तेमाल की अनुमति दे दी गई है। बावजूद इसके भारत में लोगों का एक तबका ऐसा भी है जो वैक्सीन लगवाने में हिचक रहा है, सोशल मिडिया पर आए दिन ऐसे वीडियो सामने आते हैं जहां लोग वैक्सीन नहीं लगाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों से झगड़ने लगते हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए कि केंद्र की वर्तमान टीकाकरण नीति मनमानी नहीं है, फैसला सुनाया कि किसी भी व्यक्ति को टीकाकरण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।
टीकाकरण की नीति को SC ने नहीं बताया मनमाना
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को टीकाकरण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सरकार जनता के हित में कुछ प्रतिबंध लगा सकती है। जस्टिस एल नागेश्वर राव और बी आर गवई की पीठ ने कोविड वैक्सीन को असंवैधानिक चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा, “हम रिट याचिका की स्थिरता के लिए किसी भी चुनौती का मनोरंजन करने के इच्छुक नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया, “यह अदालत संतुष्ट है कि मौजूदा टीका नीति को स्पष्ट रूप से मनमाना नहीं कहा जा सकता है।”

टीका ना लगाने वालों पर प्रतिबंध न लगाए केंद्र और राज्य सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, “जब तक संक्रमण संख्या कम है, हम सुझाव देते हैं कि सार्वजनिक स्थानों, सेवाओं और संसाधनों तक पहुंच को लेकर व्यक्तियों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए।” इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जनता के सामने कोरोना वैक्सीन से होने वाले दुष्प्रभावों को भी रखने को निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह डॉक्टर और वैज्ञानिकों का मानना है कि वैक्सीन से कोरोना और उसके वैरिएंट्स को रोका जा सकता है, ठीक उसी तरह इसके बुरे प्रभावों के बारे में भी जनता को जानकारी होनी चाहिए। अदालत ने कहा, केंद्र या राज्यों की ओर से ऐसा कोई डेटा नहीं रखा गया है कि टीका न लगवाने वाले लोगों से कैसे संक्रमण बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में टीका न लगवाने वालों पर पाबंदियां फिलहाल ठीक नहीं लगती हैं।’


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