महत्वपूर्ण खनिजों पर अमेरिका में छिड़ी बहस, चीन से बढ़ते जोखिम पर चिंता

वाशिंगटन, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका की कांग्रेस में अहम खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित करने के मुद्दे पर तीखा राजनीतिक मतभेद देखने को मिला। लॉ मेकर्स उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि इन खनिजों पर चीन का बढ़ता दबदबा देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। हालांकि इस बात पर सहमति नहीं बन पाई कि पर्यावरण से जुड़े कानून इसमें बाधा हैं या नहीं।

हाउस एनर्जी और कॉमर्स सब-कमेटी की सुनवाई में चेयरमैन गैरी पामर ने कहा, “चीन ने जरूरी खनिजों के वैश्विक बाजार पर कब्जा करने की जोरदार कोशिश की है, जिसके हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि चीन “लगभग दो दर्जन ऐसे ज़रूरी खनिजों का उत्पादन लगभग अकेले ही करता है,” जो रक्षा क्षेत्र के लिए बहुत अहम हैं।

जहां रिपब्लिकन ने तर्क दिया कि नियमों में अनिश्चितता और पुराने पर्यावरण कानूनों के कारण घरेलू खनन, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग की गति धीमी हो रही है, जिससे निवेश विदेश जा रहा है; वहीं डेमोक्रेट्स ने इसका जवाब देते हुए कहा कि पर्यावरण सुरक्षा को कमजोर करने से लागत, कर्मचारियों की कमी और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी गहरी ढांचागत चुनौतियों का समाधान नहीं होगा।

प्रिंसिपल मिनरल के क्रिस लेहमैन ने लॉ-मेकर्स को बताया कि अमेरिका “40 से ज़्यादा ज़रूरी खनिजों की अपनी आधी से ज़्यादा सप्लाई के लिए आयात पर निर्भर है, और कम से कम एक दर्जन खनिजों के लिए तो पूरी तरह से आयात पर ही निर्भर है।” उन्होंने कहा कि देश में मजबूत व्यवस्था बनाने के लिए स्पष्ट नियम, लंबे समय का निवेश और एक समान मानकों की जरूरत है।

‘रिसोर्सेज फॉर द फ्यूचर’ की बेइया स्पिलर ने चार मुख्य बाधाएं बताईं: ज़्यादा घरेलू लागत, वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव, अनुमति लेने की लंबी प्रक्रियाएं और कर्मचारियों की कमी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण नियमों को कमजोर करने से घरेलू आपूर्ति शृंखला मजबूत नहीं होगी, क्योंकि असली समस्याएं इससे कहीं बड़ी और संरचनात्मक हैं।

रेडवुड मैटेरियल्स के जोश गबकिन ने कहा कि मौजूदा नियम लिथियम-आयन बैटरियों को खतरनाक कचरा मानते हैं, जिससे अनुमति लेने में बहुत समय लगता है और काम करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति नई तकनीक के विकास के लिए बहुत नुकसानदायक है, क्योंकि मंजूरी मिलने में कई साल लग जाते हैं।

गबकिन ने चेतावनी दी कि ऐसे नियमों के कारण निवेश विदेशों की ओर जा रहा है, जबकि चीन लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग क्षमता का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा चीन के पास है, जबकि अमेरिका में कड़े नियमों के कारण रीसाइक्लिंग कंपनियां अपने उत्पाद देश में ही सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पा रहीं।

एएमजी वैनाडियम की जेन नील ने कहा कि नियमों की अस्पष्टता एक बड़ा जोखिम है। उनकी कंपनी कई सालों से काम कर रही है, फिर भी बदलती व्याख्याओं के कारण अब अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि असली समस्या नियमों की स्पष्टता की कमी है, न कि पर्यावरण नियंत्रण की।

डेमोक्रेट नेताओं ने यह भी कहा कि मांग बढ़ाने वाली नीतियां और अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी उतने ही जरूरी हैं। वरिष्ठ सदस्य पॉल टोंको ने कहा कि अमेरिका को अविश्वसनीय विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम करनी चाहिए और साथ ही दुनिया भर में पर्यावरण और श्रम मानकों को बेहतर बनाना चाहिए।

स्पिलर ने यह भी कहा कि आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन जरूरी है। अगर मांग स्थिर रहेगी, तो लंबे समय के समझौते हो पाएंगे, जिससे खनिज उत्पादकों को कीमत और मांग दोनों के बारे में भरोसा मिलेगा।

यह पूरी बहस ऐसे समय हो रही है जब अहम खनिजों को चीन के साथ प्रतिस्पर्धा में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और रक्षा क्षेत्र में।

–आईएएनएस

एएस/

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Make Punjab Kesari Your Trusted News Source

पंजाब केसरी एक हिंदी भाषा का समाचार पत्र है जो भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई केंद्रों से प्रकाशित होता है।