सिबी जॉर्ज ने एंटोनियो गुटेरेस से की मुलाकात, बहुपक्षवाद में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। उन्होंने बहुपक्षवाद के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और ग्लोबल साउथ को ज्यादा आवाज देने को लेकर विचार साझा किए। इसके अलावा, दोनों नेताओं में यूएनएससी में सुधार को लेकर भी बातचीत हुई।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीर साझा कर लिखा, “सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। सचिव (पश्चिम) ने बहुपक्षवाद के लिए भारत की मजबूत प्रतिबद्धता पर जोर दिया। दोनों ने यूएन रिफॉर्म्स और ग्लोबल साउथ को ज्यादा आवाज देने पर अपने विचार शेयर किए, जिसका भारत ने इंडिया-यूएन डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड जैसे पहलों के जरिए लगातार समर्थन किया है।”

इससे पहले सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) की बैठकों में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने भारत का पक्ष रखा। इस बैठक में यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल रिफॉर्म के अफ्रीकन मॉडल पर फोकस था।

इस बैठक में उन्होंने कहा, “भारत एल69 की ओर से सेंट लूसिया के पीआर और जी4 की ओर से ब्राजील के पीआर द्वारा दिए गए बयानों से पूरी तरह सहमत है। भारत अफ्रीकन मॉडल के प्रेजेंटेशन का तहे दिल से स्वागत करता है और इस इलाके के अपने दोस्तों को धन्यवाद देता है जिन्होंने इसे पूरा करने के लिए बहुत मेहनत की। अफ्रीकन मॉडल के लिए अपना सपोर्ट दोहराते हुए, भारत कुछ खास बातों पर जोर देना चाहेगा।”

बता दें, एल 69 समूह अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, कैरेबियन, एशिया और प्रशांत क्षेत्र के 40 से ज्यादा विकासशील देशों का एक गठबंधन है। यूएनएससी में सुधार के लिए अफ्रीकन मॉडल पेश किया गया। इस मॉडल को लेकर भारत ने अपना समर्थन जताया।

सिबी जॉर्ज ने कहा कि मॉडल दोनों कैटेगरी में विस्तार की मांग करता है। ग्लोबल साउथ के ज्यादा रिप्रेजेंटेशन की मांग, खासकर परमानेंट कैटेगरी में, जोरदार और साफ है। आज की भू-राजनीतिक सच्चाई को सही तरह से दिखाने के लिए सुरक्षा परिषद में विकासशील दुनिया का ज्यादा प्रतिनिधित्व होना चाहिए। ग्लोबल साउथ को चर्चा के दौरान सुरक्षा परिषद में ज्यादा सक्रिय भूमिका और ज्यादा प्रतिनिधित्व की जरूरत है, खासकर उन मुद्दों पर जो उन्हें सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। सुरक्षा परिषद की सदस्यता की दोनों कैटेगरी में उनका ज्यादा प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किए बिना यह हासिल नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, सुधारी हुई सुरक्षा परिषद में 26 सदस्यों का साइज भारत की नेशनल पोजीशन से अच्छी तरह मेल खाता है, जैसा कि एल69 और जी4 मॉडल में भी बताया गया है। काम करने के तरीकों को रुकावट नहीं बनाना चाहिए। इसलिए, यूएनएससी की प्रक्रिया के नियम प्रोविजनल हैं। सुरक्षा परिषद में सदस्यता की दोनों कैटेगरी को कवर करते हुए, 11 और सदस्य को शामिल करने के लिए उन्हें सही तरीके से बदला जा सकता है।

–आईएएनएस

केके/पीएम

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