5 राज्यों में फैला था हाईटेक कार चोरी नेटवर्क: क्राइम ब्रांच ने मास्टरमाइंड समेत 10 को दबोचा, 31 लग्जरी गाड़ियां बरामद

Summary :

Delhi Police Bust Interstate Car Theft Racket: दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने लग्जरी गाड़ियों की चोरी कर उनके चेसिस नंबर से छेड़छाड़ के बाद जाली दस्तावेजों के जरिए उनका दोबारा पंजीकरण के बाद ठिकाने लगाने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। क्राइम ब्रांच ने इस गिरोह के 10 मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से चेसिस नंबरों से छेड़छाड़ की गई फॉर्च्यूनर, इनोवा, थार, स्कॉर्पियो और क्रेटा जैसी कुल 31 गाड़ियां बरामद की हैं। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों की पहचान दमनदीप सिंह, अरविंद शर्मा, अमनदीप, सुभाष चंद, मनबीर सिंह उर्फ मिंटा, कंवरजीत उर्फ जाली,…

Delhi Police Bust Interstate Car Theft Racket: दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने लग्जरी गाड़ियों की चोरी कर उनके चेसिस नंबर से छेड़छाड़ के बाद जाली दस्तावेजों के जरिए उनका दोबारा पंजीकरण के बाद ठिकाने लगाने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। क्राइम ब्रांच ने इस गिरोह के 10 मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से चेसिस नंबरों से छेड़छाड़ की गई फॉर्च्यूनर, इनोवा, थार, स्कॉर्पियो और क्रेटा जैसी कुल 31 गाड़ियां बरामद की हैं। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों की पहचान दमनदीप सिंह, अरविंद शर्मा, अमनदीप, सुभाष चंद, मनबीर सिंह उर्फ मिंटा, कंवरजीत उर्फ जाली, बृज मोहन कपूर उर्फ बॉबी, प्रदीप सिंह उर्फ हीरा, तिफ्ले नौखेज और हेमराज सिंह उर्फ हेमा के रूप में हुई है।

ई-प्राथमिकी से अंतरराज्यीय वाहन चोरी सिंडिकेट का भंडाफोड़

डीसीपी (क्राइम) आदित्य गौतम ने बताया कि यह मामला अगस्त 2025 में मौर्य एनक्लेव थाने में दर्ज एक ई-प्राथमिकी से संबंधित है, जिसमें पीतमपुरा की एक निवासी ने अपनी एसयूवी चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई, जिसने जांच के दौरान दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में फैले इस बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि यह गिरोह न केवल वाहन चोरी करता था, बल्कि कर्ज की किस्त न चुकाने के कारण जब्त की गई गाड़ियां भी हासिल करता था और उनके इंजन व चेसिस नंबर बदलकर उन्हें नई पहचान देते थे। अधिकारियों के अनुसार, गिरोह के लोग वाहनों के पुन: पंजीकरण के लिए फर्जी बिक्री प्रमाण पत्र (फॉर्म-21), जाली पंजीकरण कागजात और बैंक के फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का उपयोग करते थे।

मास्टरमाइंड समेत 10 आरोपी गिरफ्तार

डीसीपी ने बताया कि आरोपियों ने चोरी की गाड़ियों को वैध बनाने के लिए एक समानांतर व्यवस्था बना रखी थी और इन्हें अच्छे दामों पर खरीदारों को बेच देते थे। साजिश की गहराई तक जांच के लिए अपराध शाखा ने इस साल जनवरी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत एक अलग मामला दर्ज किया था। पुलिस ने कई राज्यों में छापेमारी कर सरगना दमनदीप सिंह उर्फ लकी (42) सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। दमनदीप जालंधर में पुरानी कारों की खरीद-बिक्री का काम करता था और कथित तौर पर पूरे नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर और आरटीओ क्लर्क की मिलीभगत से बड़ा खेल

गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, हिमाचल प्रदेश के पंजीकरण प्राधिकरण का एक लिपिक, चेसिस नंबर बदलने में माहिर मैकेनिक और बिचौलिये शामिल हैं। जांचकर्ताओं ने बताया कि गिरोह के सदस्यों ने ओटीपी में हेरफेर करके प्राप्त अनधिकृत विवरण का उपयोग करते हुए वाहन पोर्टल तक पहुंच प्राप्त की और फर्जी पंजीकरण दस्तावेज तैयार किए। संदेह है कि इस सिंडिकेट ने अब तक एक हजार से अधिक वाहनों का फर्जी पंजीकरण कराया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह पकड़े जाने से बचने के लिए अलग-अलग राज्यों में चोरी, पंजीकरण और बिक्री का काम बेहद शातिर तरीके से करता था। कुछ सदस्य इन वाहनों का इस्तेमाल मादक पदार्थों की तस्करी जैसी अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए भी करते थे।

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Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।