म्यूल अकाउंट के जरिए दिल्ली में बुजुर्ग से हुई थी 22 करोड़ की धोखाधड़ी, 5 बैंकों को 1.31 करोड़ भरने का आदेश

RBI on Delhi Digital Arrest Case

RBI on Delhi Digital Arrest Case : दिल्ली के रहने वाले 78 साल के बुजुर्ग नरेश मल्होत्रा के साथ हाल ही में 22.92 करोड़ रुपये की डिजिटल धोखाधड़ी का मामला सामने आया था. जिसके बाद आज उन्हें थोड़ी राहत देते हुए आरबीआई (RBI) ने पांच बड़े बैंकों को आदेश दिया है कि वे नुकसान की कुछ भरपाई करें. यह फैसला अपने आप में जरूरी माना जा रहा है क्योंकि आमतौर पर डिजिटल धोखाधड़ी मामलों में बैंक की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है.

RBI on Delhi Digital Arrest Case: क्या था मामला

RBI on Delhi Digital Arrest Case
RBI on Delhi Digital Arrest Case (Source: Social Media)

बता दें नरेश मल्होत्रा बैंक से रिटायर्ड कर्मचारी हैं. पिछले साल अगस्त और सितम्बर के महीने के बीच उनके साथ डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी हुई थी. यह ठगी अब तक की सबसे बड़ी ठगी थी, जिसमें उनके अकाउंट से तकरीबन 22 करोड़ रूपए ऐंठ लिए गए थे.

यह मामल तब शुरू हुआ जब उनके मोबाइल पर फोन आया. फोन करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का बताते हुए दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे क्राइम में हुआ है. नरेश के अनुसार, शुरूआत में फोन नॉर्मल पूछताछ लगा लेकिन बाद में बुजुर्ग को एक फर्जी जांच प्रक्रिया में उलझा दिया, जिसे उन्होंने डिजिटल अरेस्ट बताया.

फोन पर उन्हें सख्त निर्देश दिए गए कि वह घर से बाहर न निकलें, किसी से बात न करें और हर समय वीडियो कॉल पर रहें. बुजुर्ग को इतना डरा दिया कि वह खुद को गिरफ्तार समझकर वीडियो कॉल पर ही बैठे रहे. बुजुर्ग काफी ज्यादा डर गए और डर का फायदा उठाकर ठगों ने उनसे कई किश्तों में अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में पैसा ट्रांसफर करवा लिया.

बता दें, जांच में सामने आया कि यह पैसा जिन बैंक खातों में गया, वे म्यूल अकाउंट (Mule Account) थे. यानी वे अकाउंट जिनका इस्तेमाल अपराधी अवैध पैसों के लेन-देन को छिपाने के लिए करते हैं.

Digital Arrest Scam India: 5 बैंक को जिम्मेदारी तय

Digital Arrest Scam India
Digital Arrest Scam India (Source: Social Media)

इस मामले में आरबीआई के लोकपाल ने पाया कि एक्सिस बैंक, सिटी यूनियन बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इंडसइंड बैंक और यस बैंक ने अपने यहां खुले इन फर्जी खातों की निगरानी सही से नहीं की थी.

इन 5 बैंकों ने केवाईसी और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग के नियमों का सही से पालन नहीं किया. इस चलते इन बैंकों को 7.5% हिस्सा पीड़ित को लौटाने का आदेश दिया. यस बैंक पर ज्यादा जुर्माना इसलिए लगा, क्योंकि उसके यहां पुराने और बंद पड़े खातों में संदिग्ध हलचल को रोकने में ज्यादा लापरवाही देखी गई. कुल मिलाकर इन बैंकों को 1.31 करोड़ रुपये पीड़ित को देने पड़े हैं.

इस मामले में नरेश मल्हौत्रा को 1.31 करोड़ रुपये मिल चुके हैं, लेकिन 22 करोड़ के आगे यह कुछ भी नहीं हैं. उन्होंने आरबीआई और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपील की है कि जब बैंकों ने खुद माना है कि नियमों के पालन में कमी रही, तो उन्हें उनके पूरे 22.92 करोड़ रुपये वापस मिलने चाहिए.

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