भजन क्लबिंग

मुझे 15 फरवरी शिवरात्रि वाले दिन जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम दिल्ली में महाशिवरात्रि भजन क्लबिंग में मुख्य अतिथि के लिए निमंत्रण मिला है। बहुत दिनों से फेसबुक पर भजन क्ल​िंबंग के प्रोमो देख रही थी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था कि आज का युवा भजन क्ल​िंबंग की तरफ आकर्षित हो रहा है और जब मुझे बताया गया कि इसमें 2000 युवक-युवतियां दिल्ली-एनसीआर से होंगे और आधुनिक तथा संस्कारों के मिश्रण के साथ प्रोग्राम होगा तो मैं ना नहीं कर सकी। क्योंकि हमेशा मेरा मकसद और प्रयास होता है कि युवाओं को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना। जब हर्ष ने बताया कि बांसुरी स्वराज भी होंगी तो मेरी खुशी की सीमा नहीं रही। हालांकि मुझे 16 फरवरी की सुबह ट्रेवल करना है। क्योंकि मैं शिवभक्त हूं और ऐसा अवसर शिव ने ही मुझे दिया है। इसमें गजेन्द्र प्रताप सिंह, सुहास सावन इमेंसिव कीर्तन टीम मुम्बई से आ रही है। मुझे नहीं मालूम यह काम्पर्शियल इवेंट है या कुछ और परन्तु प्रयास बहुत ही अच्छा है।
आज का युवा अपनी जड़ों को जानना चाहता है। इस भौतिकतावादी समय और पश्चिमी प्रभाव के बीच वह अपनी संस्कृति से जुड़ाव महसूस करना चाहता है। प्रतिस्पर्धा, करियर का दबाव, सोशल मीडिया की दौड़ इन सबके बीच भजन, ध्यान और आध्यात्मिक संगीत युवाओं को शांति देगा। यही नहीं आज इंस्टग्राम रील यू ट्यूब, लिंक, व्यूज। अब भजन भी आधुनिक बीट पर डीजे और लाइटिंग के साथ जब पेश किए जाएंगे तो धार्मिक संगीत भी ट्रेंडी हो जाएगा। मैं कथावाचक इन्द्रेश जी का हर समय रील पर जगन्नाथ… कभी युवाओं और कभी बच्चों, महिलाओं के मुंह पर सुनती हूं तो मैं भी उसे देख-देखकर गुनगुनाने लगी हूं। यानि जो आप देखोगे आपको पसंद आएगा तो आप भी उसे धारण करना शुरू कर देंगे। पहले क्ल​िंबंग सिर्फ डांस और पार्टी से जुड़ी थी। अब ‘‘भजन क्लबिंग’’ में संगीत, डांस, ऊर्जा आैर भक्ति का ​िमश्रण है जो युवाओं को आकर्षित करता है। मुझे यह भी मालूम हो रहा है कि कुछ युवा नशे या गलत संग​ित से दूर रहकर ‘‘सांस्कृतिक एंटरटेनमेंट’’ की ओर बढ़ रहे हैं। आज का युवा भारतीय संस्कृति से जुड़ रहा है, धार्मिक हो रहा है लेकिन पुराने तरीके से नहीं वह ऊर्जा, संगीत और आधुनिक प्रस्तुति के साथ भक्ति चाहता है।
मैं यह भी महसूस करने और देखने जाऊंगी कि अगर यह पहल शिवरात्रि वाले दिन श्रद्धा, मर्यादा और सकारात्मक सोच के साथ है कि नहीं? अगर है तो यह एक नई संस्कृति जागृत होगी लेकिन अगर इसका उद्देश्य केवल भीड़ या प्रचार है या कम्पनी का इवेंट है। अगर 2000 युवाओं में 10 युवा भी असल में इसकी तरफ आकर्षित होते हैं तो भी प्रयास सार्थक है क्योंकि यह उनके भीतर की पुकार होगी। पहले क्ल​िंबंग का अर्थ केवल मनोरंजन था। आज ‘‘भजन क्लबिंग’’ में संगीत है, ऊर्जा है लेकिन साथ में भक्ति भी है। यह दिखाता है कि हमारा युवा नशे की ओर मुड़ सकता है तो वह संस्कृति, संस्कारों की तरफ भी मुड़ सकता है, क्योंकि भजन केवल बीट्स और लाइट्स का नाम नहीं है, भजन भाव है, भजन जुड़ाव है, भजन आत्मा की शांति है। अगर हम भक्ति को केवल इवेंट बना देंगे तो उसका प्रभाव ​क्षणिक होगा लेकिन हम जीवन का हिस्सा बना लें तो वही समाज को नई दिशा होगी।
आज की पीढ़ी मंदिर भी जाती है और मोबाइल भी चलाती है। वह शिवरात्रि भी मनाती है और स्टार्टअप भी बनाती है। यही नया भारत है जहां परम्परा और प्रगति साथ-साथ चलती हैं। अगर त्यौहारों से समाज में एकता आती है, अगर सांस्कृतिक कार्यक्रमों सकारात्मक माहौल बनता है तो यह एक सुन्दर शुरूआत है। हमें धर्म का प्रदर्शन नहीं जीवन का आचरण बनाना होगा। मैं दावे से कह सकती हूं कि जब युवा जागता है तो राष्ट्र आगे बढ़ता है और जब युवा अपनी जड़ों से जुड़ता है तो राष्ट्र मजबूत बनता है। पहले भजनों को सिर्फ बुजुर्गों से जोड़ा जाता था। आज युुवा भजनों के साथ जुड़ रहे हैं नए अंदाज और नए बदलाव के साथ। क्योंकि आज के युवक को करियर के साथ-साथ मानसिक शांति चाहिए। तो आइये इस बार शिवरात्रि को सिर्फ भक्ति और उत्सव तक सीमित न रखें। समाज और देश को मजबूत बनाएं।

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