मिजोरम ने सीमा पार नशीले पदार्थों के नेटवर्क पर कार्रवाई तेज की

आइजोल, 23 ​​अप्रैल (आईएएनएस)। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि मिजोरम सरकार ने सीमावर्ती राज्य में बढ़ते नशे के खतरे पर लगाम लगाने और तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

गृह विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 12वीं राज्य-स्तरीय एनसीओआरडी (नार्को समन्वय केंद्र) बैठक बुधवार को नए राजधानी परिसर स्थित सचिवालय सम्मेलन कक्ष में आयोजित की गई।

मुख्य सचिव खिली राम मीणा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पुलिस महानिदेशक शरद अग्रवाल, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, सभी 11 जिलों के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक शामिल हुए। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएप), सहायक खुफिया ब्यूरो (एसआईबी) और मिजोरम में चर्चों की परिषद सहित प्रमुख एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भी इसमें भाग लिया।

बैठक के दौरान, मुख्य सचिव ने 11वीं राज्य-स्तरीय एनसीओआरडी बैठक की ‘की गई कार्रवाई रिपोर्ट’ की समीक्षा की, जिसमें उन्होंने प्रगति का आकलन किया और प्रवर्तन तथा समन्वय में मौजूद कमियों की पहचान की। पूरे मिजोरम में नशामुक्त गांवों की पहचान करने और उन्हें घोषित करने के लिए ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ भी पेश की गई और उस पर विस्तार से चर्चा हुई; यह राज्य का जमीनी स्तर पर हस्तक्षेप पर दिए जा रहे जोर को दर्शाता है।

प्रतिभागियों ने नई दिल्ली में आयोजित 9वीं शीर्ष-स्तरीय एनसीओआरडी बैठक के दौरान जारी किए गए 15 कार्य बिंदुओं पर भी विचार-विमर्श किया, ताकि नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में राज्य-स्तरीय रणनीतियों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ा जा सके।

अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इससे पहले नई दिल्ली में 9वीं शीर्ष-स्तरीय एनसीओआरडी बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें उन्होंने देश में नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने के प्रयासों की समीक्षा की थी। इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और राष्ट्रीय नशीले पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों के हितधारक एक मंच पर एकत्रित हुए थे।

मिजोरम की भौगोलिक स्थिति इसकी संवेदनशीलता को और बढ़ा देती है, क्योंकि यह म्यांमार के साथ 510 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा और बांग्लादेश के साथ 318 किलोमीटर लंबी खुली व पहाड़ी सीमा साझा करता है। इन परिस्थितियों के कारण यह राज्य नशीले पदार्थों और अन्य अवैध सामानों की सीमा-पार तस्करी के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हो जाता है।

म्यांमार से सटा हुआ चिन राज्य, नशीले पदार्थों, हथियारों और गोला-बारूद, दुर्लभ वन्यजीवों, दुर्लभ औषधीय पौधों, विदेशी सिगरेट, म्यांमार की सुपारी (कत्था) और अन्य प्रतिबंधित सामानों की तस्करी के एक प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। इन अवैध वस्तुओं की तस्करी अक्सर मिजोरम के छह जिलों (चम्फाई, सियाहा, लॉंगतलाई, ह्नाहथियाल, सैतुअल और सेरछिप) के रास्ते की जाती है, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं।

तस्करी की जाने वाली सबसे आम चीज़ों में मेथामफेटामाइन की गोलियां शामिल हैं, जिन्हें आमतौर पर ‘याबा’ या “पार्टी टैबलेट” के नाम से जाना जाता है।

–आईएएनएस

एसडी/डीकेपी

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