इंदौर, 25 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया है कि इंदौर को नजरअंदाज किया जा रहा है और उन्होंने नागरिकों से मेट्रोपॉलिटन विकास के मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की है।
सज्जन सिंह वर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया के विकास के नाम पर शुरू की गई यह पूरी कवायद अब एक खेल बन गई है। इंदौर के बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने मांग की थी कि एक इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया बनाया जाए, क्योंकि यहां विकास की अपार संभावनाएं हैं। इंदौर मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी है, जहां से बड़ी मात्रा में टैक्स रेवेन्यू भोपाल और दिल्ली के खजाने में जाता है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इसका नाम बदलकर उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया कर दिया है और इंदौर के साथ दूसरे दर्जे के शहर जैसा व्यवहार किया है। मेरा मानना है कि यह इंदौर के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। मुख्यमंत्री इस जिले के प्रभारी हैं, इसलिए उनका दायित्व है कि इंदौर के साथ न्याय करें।”
नर्मदा का आंदोलन याद करते हुए सज्जन सिंह ने कहा, “अब आंदोलन करने वाले नहीं रह गए हैं। हमने नर्मदा के लिए सफलतापूर्वक आंदोलन किया था, जिसकी बदौलत नर्मदा आई और इंदौर की जनता को अपना आशीर्वाद दिया। नर्मदा नहीं आई होती तो इंदौर खाली हो जाता। अफसोस, अब ऐसे आंदोलन करने वाले लोग नहीं हैं। अब इंदौर के लिए बुद्धिजीवियों और नागरिकों से आंदोलन करने की मांग करता हूं। अब भाजपा सरकार तभी सुनेगी व इंदौर के साथ न्याय करेगी और मेट्रोपॉलिटन का नाम बदलने का फैसला वापस लेगी। अगर इंदौर का सम्मान बरकरार रखना है तो इंदौरवासियों को नर्मदा आंदोलन की तरह फिर से एकजुट होना होगा।”
सज्जन सिंह ने कहा, “इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया का नाम बदलना मुख्यमंत्री की छोटी सोच का नतीजा है। मुख्यमंत्री इंदौर के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं। इंदौर के लोगों को अगर न्याय पाना है तो कठोर श्रम करना पड़ेगा। सरकार और मुख्यंमत्री को कटघरे में खड़ा करना पड़ेगा, तभी न्याय मिलेगा और हमारी बात सुनी जाएगी।”
–आईएएनएस
ओपी/पीएम
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