छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों के लिए आयोजित अध्ययन यात्रा केवल एक पर्यटन कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की सामरिक शक्ति, प्राकृतिक सौंदर्य और वीर सैनिकों के अदम्य साहस को निकट से जानने का एक दुर्लभ अवसर है। इस यात्रा की शुरुआत रायपुर से श्रीनगर पहुंचने के साथ हुई, जहां से सड़क मार्ग से सोनमर्ग की ओर प्रस्थान किया गया।
कारगिल विजय दिवस पर द्रास पहुंचे पत्रकार
हिमालय की गोद में बसा सोनमर्ग अपनी बर्फ से ढकी चोटियों, हरे-भरे मैदानों और सिंध नदी की निर्मल धारा के कारण हर यात्री को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहां एक दिन के प्रवास के दौरान वरिष्ठ पत्रकारों ने कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता के साथ स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली को भी करीब से समझा।
अगले दिन यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक चरण शुरू हुआ। जोजिला दर्रे की दुर्गम पहाड़ियों को पार करते हुए दल कारगिल पहुंचा। यह मार्ग अपने आप में भारतीय सेना के अदम्य साहस और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के संघर्ष का साक्षात परिचय कराता है।
इस बार का कारगिल प्रवास इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि संयोगवश हमारी यात्रा 26 जुलाई, कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल पहुंची। पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा हुआ था। द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल में प्रवेश करते ही ऊंचे तिरंगे, अमर ज्योति और गुलाबी पत्थरों पर अंकित शहीदों के नाम देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो इन वादियों में आज भी उन वीर सैनिकों के कदमों की आहट और उनकी वीरता की गूंज सुनाई दे रही हो।
527 से अधिक वीर जवानों ने बलिदान दिया
वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत दुश्मनों से टाइगर हिल, तोलोलिंग सहित कई रणनीतिक चोटियों को पुनः अपने कब्जे में लेकर इतिहास रच दिया था। इस युद्ध में देश के 527 से अधिक वीर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। कारगिल वॉर मेमोरियल उन्हीं अमर शहीदों की स्मृति को समर्पित है। यहां युद्ध से जुड़े हथियार, तस्वीरें, दस्तावेज और शौर्य गाथाएं हर भारतीय के मन में गर्व और सम्मान का भाव जगा देती हैं।
सेना के अधिकारियों ने याद की वीरों की अद्वितीय बहादुरी
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में देशभर से आए लोगों ने शहीदों को नमन किया। भारतीय सेना के अधिकारियों ने युद्ध के विभिन्न पहलुओं, कठिन परिस्थितियों और वीर सैनिकों की अद्वितीय बहादुरी की जानकारी दी। हर घटना यह संदेश देती है कि भारत की सीमाएं केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सैनिकों के अटूट साहस, अनुशासन और मातृभूमि के प्रति समर्पण से सुरक्षित हैं।

कारगिल वॉर मेमोरियल में बिताया गया समय इस अध्ययन यात्रा का सबसे प्रेरणादायक पड़ाव साबित हुआ। यहां पहुंचकर यह एहसास और गहरा हो जाता है कि देश की स्वतंत्रता और सुरक्षा की कीमत हमारे सैनिक अपने प्राणों की आहुति देकर चुकाते हैं। यह स्थान केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, शौर्य और बलिदान का जीवंत तीर्थ है।
“जब तक अटल हिमालय रहेगा, अमर रहेगा कारगिल के वीरों का बलिदान”
अध्ययन यात्रा का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, वहां की सामाजिक परिस्थितियों, सामरिक महत्व और भारतीय सेना की भूमिका को समझना भी है। कारगिल से आगे यह यात्रा लेह-लद्दाख की ओर बढ़ रही है, जहां प्रकृति, संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।
कारगिल की पवित्र धरती से लौटते समय मन में एक ही भावना थी, इन बर्फीली चोटियों पर बहा हर वीर का रक्त भारत की आन, बान और शान का प्रतीक है। जब तक हिमालय अटल रहेगा, तब तक कारगिल के अमर शहीदों का शौर्य और बलिदान हर भारतीय के हृदय में अमर रहेगा।
रिपोर्ट- कारगिल से आशीष शर्मा



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