‘पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते’ सिंधु जल संधि पर भारतीय राजदूत का पाकिस्तान को जवाब

Summary :

अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि पाकिस्तान के लगातार सीमा पार आतंकवाद और अड़चनों के कारण खत्म हुई। उन्होंने कहा कि पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते, पाकिस्तान पहले अपना आतंकी ढांचा ध्वस्त करे।

Indus Waters Treaty Suspension

Indus Waters Treaty Suspension : अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि जिस सद्भावना और दोस्ती की बुनियाद पर टिकी थी, उसे पाकिस्तान ने अपने हरकतों से खुद खत्म किया है। अमेरिकी पत्रिका ‘न्यूजवीक’ में लिखे एक कड़े लेख में उन्होंने स्पष्ट किया कि संधि को सस्पेंड करना कोई नया फैसला नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत की औपचारिक स्वीकारोक्ति भर है।

भारत ने यह कड़ा कदम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद उठाया था, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई थी। क्वात्रा का यह बयान पाकिस्तान द्वारा भारत के इस फैसले के खिलाफ आयोजित किए गए सम्मेलन के जवाब में सामने आया है।

असमान समझौते के बावजूद भारत ने निभाई ईमानदारी

Indus Waters Treaty Suspension

वर्ष 1960 में हुई सिंधु जल संधि के तहत छह नदियों में से भारत को महज 20 फीसदी जल प्रवाह वाली नदियों का अधिकार मिला था, जबकि 80 फीसदी पानी पाकिस्तान के हिस्से गया। भारतीय राजदूत ने कहा कि इस बेहद असमान व्यवस्था के कारण भारत के कई इलाकों का विकास दशकों तक रुका रहा, फिर भी नई दिल्ली ने समझौते का पूरी निष्ठा से पालन किया।

इसके बदले पाकिस्तान ने भारत पर 1965, 1971 और 1999 में युद्ध थोपे। यही नहीं, 2001 के संसद हमले, 2008 के मुंबई हमले, उरी, पठानकोट, पुलवामा और हालिया पहलगाम हमले तक पाकिस्तान ने लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दिया है।

तकनीकी सुधारों में बाधा

क्वात्रा ने लिखा कि भारत जब भी समय के हिसाब से हाइड्रोपावर (जलविद्युत) क्षमता बढ़ाने या संधि में जरूरी तकनीकी बदलावों की कोशिश करता, पाकिस्तान नौकरशाही अड़ंगों से उन्हें रोकने में लगा रहता। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि पाकिस्तान वाकई सहयोग चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपने देश में पल रहे आतंकी ढांचे का सफाया करना होगा। इसके अलावा जो लोग फिर से बातचीत की वकालत कर रहे हैं, वे अतीत की नाकामियों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

पानी और खून एक साथ नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्पष्ट रुख को दोहराते हुए क्वात्रा ने कहा कि “आतंक और बातचीत, व्यापार और आतंक, तथा पानी और खून कभी एक साथ नहीं बह सकते।”

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आज जिस जल संकट से जूझ रहा है, वह उसकी अपनी सरकारों की नाकामी और बेहद खराब वॉटर मैनेजमेंट (जल प्रबंधन) का नतीजा है। पाकिस्तान को अपनी अंदरूनी नाकामियों का ठीकरा भारत पर फोड़ने और धमकियां देने के बजाय अपने घर की व्यवस्था सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।