आध्यात्मिक उत्साह के बीच तथागत भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष पहुंचे लेह, उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने किया औपचारिक स्वागत

Gautam Buddha Sacred Relics Leh

Gautam Buddha Sacred Relics Leh: गहरी आध्यात्मिक श्रद्धा और भक्ति से ओत-प्रोत वातावरण के बीच आज तथागत भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष लेह पहुंचे, जिसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्सव का शुभारंभ हो गया। इस विशेष अवसर पर पूरे क्षेत्र में उत्साह, आस्था और सांस्कृतिक रंग देखने को मिले।

अवशेषों के स्वागत के लिए भव्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें पारंपरिक प्रस्तुतियां, धार्मिक अनुष्ठान और औपचारिक सम्मान शामिल रहे। इन पवित्र अवशेषों को दिल्ली से विशेष वायुसेना विमान के जरिए डुकपा थुकसे रिनपोछे और माथो मठ के खेनपो थिनलास चोसल द्वारा लेह लाया गया। लेह पहुंचने पर लद्दाख के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने इनका विधिवत स्वागत किया।

लद्दाख में पवित्र अवशेषों का ऐतिहासिक स्वागत समारोह

स्वागत समारोह में पारंपरिक प्रस्तुतियां, औपचारिक सम्मान और पवित्र अनुष्ठान संपन्न हुए। द्रुकपा थुकसे रिनपोचे और माथो मठ के खेनपो थिनलास चोसल द्वारा एक विशेष वायु सेना विमान से दिल्ली से लाए गए अवशेषों को लद्दाख के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने खामतक रिनपोचे, रिग्याल रिनपोचे, लद्दाख गोम्पा एसोसिएशन के अध्यक्ष वेन. दोरजे स्टैनजिन, लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लकरुक, पूर्व सांसद थुपस्टन चेवांग और जामयांग त्सेरिंग नामग्याल, पूर्व सीईसी एलएएचडीसी लेह ताशी ग्यालसन और विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित प्रमुख धार्मिक और सार्वजनिक हस्तियों की उपस्थिति में ग्रहण किया। लद्दाख पुलिस ने इस दौरान औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया, जबकि बौद्ध भिक्षुओं ने विशेष प्रार्थनाएं कीं। स्वागत समारोह के बाद पवित्र अवशेषों को एक भव्य शोभायात्रा के रूप में जीवेत्सल ले जाया गया, जहां 1 मई से आम लोगों के दर्शन के लिए प्रदर्शनी शुरू होगी। यह दिन 2569वीं बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाएगा।
Gautam Buddha Sacred Relics Leh
Gautam Buddha Sacred Relics Leh

इस ऐतिहासिक आयोजन में पूरे लद्दाख से हजारों श्रद्धालुओं ने भागलिया। पारंपरिक परिधानों में सजे लोग रास्तों के किनारे खड़े होकर पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए उत्सुक दिखाई दिए। स्कूली बच्चों और तिब्बती समुदाय के लोगों ने भी पारंपरिक बेशभूषा में फूलों और स्वागत गीतों के साथ अतिथियों का अभिनंदन किया।

भारत में पहली बार भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को दर्शनार्थ रखा जा रहा है: सक्सेना

उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने इस अवसर को अत्यंत शुभ बताते हुए कहा कि पवित्र अवशेषों के आगमन से पूरा लद्दाख धन्य हो गया है। उन्होंने बताया कि ये अवशेष पहले कई देशों में प्रदर्शित किए जा चुके हैं, लेकिन यह पहली बार है जब इन्हें भारत में उनके मूल संरक्षण स्थल से बाहर निकालकर प्रदर्शित किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लद्दाख को इस आयोजन के लिए चुना जाना क्षेत्र के लिए गर्व की बात हैं। उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में इस आयोजन में शामिल होकर भगवान बुद्ध का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील भी की। पिपरहवा के ये पवित्र अवशेष पहले थाईलैंड, मंगोलिया, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, भूटान, श्रीलंका और म्यांमार जैसे देशों में प्रदर्शित किए जा चुके हैं, जहां इन्हें
अपार श्रद्धा और सम्मान मिला। लद्दाख में ये अवशेष 2 मई से 10 मई तक जीवेत्सल में दर्शन के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसके बाद 11 और 12 मई को जांस्कर में तथा 13 और 14 मई को लेह के धर्म केंद्र में इनका प्रदर्शन किया जाएंगा। 15 मई को इन्हें पुनः दिल्ली वापस ले एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह में पिपरहवा अवशेषों का महत्व और जाया जाएगा। इस दौरान केंद्रीय गृह सहित कई केंद्रीय मंत्री, बौद्ध बहुल राज्यों के मुख्यमंत्री, विभिन्न देशों के सजदूत और बौद्ध संगठनों के प्रतिनिधि भी लेह पहुंचकर इन पवित्र अवशेषों के दर्शन करेंगे। हाल के वर्षों भी बढ़ गया है। लगभग 127 वर्षों तक औपनिवेशिक कब्जे में रहने के बाद, जुलाई 2025 में इससे जुड़े कई रत्न और अर्पण सामग्री ब्रिटेन से भारत वापस लाई गईं थी।

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