Vibrant Gujarat Regional Conference 2026: गुजरात के सूरत में 1 से 2 मई तक आयोजित दो दिवसीय वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) ने दक्षिण गुजरात के विकास को नई रफ्तार देने का मजबूत आधार तैयार कर दिया है। सम्मेलन के दौरान कुल 2,792 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, जिनके जरिए 3,53,306 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव सामने आया है। इन परियोजनाओं के लागू होने से आने वाले वर्षों में करीब 2.82 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। शुक्रवार को सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर ऐसे आयोजन राज्य के हर जिले को वैश्विक पहचान दिलाने और संतुलित विकास सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम हैं। उन्होंने बताया कि दक्षिण गुजरात जिसमें सूरत, भरूच, नवसारी, वलसाड, तापी और डांग शामिल हैं को यह सम्मेलन औद्योगिक विकास का नया इंजन देगा।
मुख्यमंत्री ने सूरत आर्थिक क्षेत्र की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि केमिकल, फार्मा, टेक्सटाइल, हीरा-जवाहरात, कृषि, रियल एस्टेट और पर्यटन जैसे सेक्टर में बड़े पैमाने पर विस्तार की संभावनाएं हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2047 तक यह क्षेत्र 20 गुना तक बढ़ सकता है और गुजरात के जीएसडीपी में 35 फीसदी से अधिक योगदान देगा। वहीं केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने सूरत की औद्योगिक क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि यहां निर्मित स्टील का उपयोग दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल ‘चिनाब ब्रिज’ में हुआ है, जो राज्य की ताकत को दर्शाता है।
आठ नए स्मार्ट जीआईडीसी से औद्योगिक ढांचा होगा मजबूत
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने दक्षिण गुजरात में 8 नए स्मार्ट जीआईडीसी औद्योगिक एस्टेट विकसित करने की घोषणा की है। इनमें सूरत में 2, भरूच में 3 और वलसाड, नवसारी व तापी में एक-एक एस्टेट शामिल होंगे। कुल 5,380 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले ये एस्टेट निवेश और रोजगार के बड़े केंद्र बनेंगे।
निवेश से रोजगार और स्थानीय उद्योगों को मिलेगा बल
समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बताया कि इन निवेश प्रस्तावों के लागू होने से अगले तीन वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद सिर्फ बड़े निवेशकों को लाना नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों को भी वैश्विक अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में अमेरिका, कनाडा, जापान, सिंगापुर और रवांडा सहित 20 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिससे स्थानीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से सीधे जुड़ने का मौका मिला।
आदिवासी क्षेत्रों और महिलाओं पर भी रहा फोकस
सरकार की योजना दक्षिण गुजरात के आदिवासी जिलों डांग, तापी, नवसारी और वलसाड में गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को बढ़ावा देने की है। खास तौर पर गारमेंट सेक्टर पर जोर दिया जा रहा है, जिससे अगले दो वर्षों में 25,000 से अधिक महिलाओं को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम के दौरान सूरत के हीरा उद्योग को मिले जीआई टैग के उपलक्ष्य में विशेष डाक कवर जारी किया गया और राज्य के विकास विजन पर आधारित फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
क्षेत्रीय मॉडल से विकास का नया रास्ता
गौरतलब है कि इससे पहले मेहसाणा (उत्तर गुजरात) और राजकोट (सौराष्ट्र-कच्छ) में भी ऐसे सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। सरकार अब वाइब्रेंट गुजरात को गांधीनगर से आगे बढ़ाकर पूरे राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों तक ले जा रही है, ताकि विकास का लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंचे। कुल मिलाकर, सूरत में आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन दक्षिण गुजरात के लिए निवेश, उद्योग और रोजगार के लिहाज से बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
रिपोर्ट: प्रगनेश सिंह


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