Uttarakhand Heavy Snowfall: उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाके में मौसम ने फिर करवट ली है। रविवार रात से ही चमोली जिले के ऊपरी इलाकों में लगातार भारी बर्फ़बारी हो रही है। इसके चलते बद्रीनाथ धाम का परिसर सफ़ेद चादर से ढक गया है। मंदिर के आस-पास के नीलकंठ पर्वत और नारायण पर्वत भी बर्फ की सफेद चादर में लिपटे हुए नजर आ रहे हैं।
बर्फ़बारी के कारण तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। जिससे इलाके में फिर से ठंड की वापसी हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आज सोमवार को देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी, नैनीताल, चंपावत में बारिश व ओलावृष्टि के साथ तूफान अलर्ट जारी किया है। जबकि उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भी तूफान का अलर्ट है।
#WATCH | Uttarakhand: Heavy snowfall has been continuing since Sunday night in the high-altitude areas of Chamoli district. Intense snowfall has been recorded around the temple premises in Shri Badrinath Dham, including Neelkanth Parvat and Narayan Parvat.
Due to the snowfall,… pic.twitter.com/DOO33yuvX6
— ANI (@ANI) March 16, 2026
बर्फबारी से बढ़ी ठंड
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बर्फ़बारी होने से क्षेत्र में ठंड का प्रभाव बढ़ा है। खराब मौसम के चलते लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उत्तराखंड में इससे पहले 28 जनवरी को केदारनाथ धाम में भी भारी बर्फ़बारी देखने को मिली थी। उस समेत केदारनाथ मंदिर के परिसर में करीब 3-4 फीट तक की बर्फ की मोटी चादर छा गई थी।
भारी बर्फबारी के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत
रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन के अनुसार, क्षेत्र में भारी बर्फबारी के बावजूद केदारनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और रुद्रप्रयाग पुलिस के जवान कड़ाके की ठंड और खराब मौसम में भी मंदिर परिसर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रहे हैं। तेज बर्फीली हवाओं और कठिन रास्तों के बावजूद सुरक्षा बलों का मनोबल ऊंचा बना हुआ है।
बारिश के बाद बुझी जंगलों की आग
रविवार को हुई बारिश के बाद से जंगलों की आग बुझ गई है। नवंबर से ही जंगलों में आग की घटनाएं सामने आने लगी थी। 15 फरवरी से फायर सीजन शुरू हुआ, तब से जंगल की आग की 84 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि नियंत्रण सुशांत पटनायक ने बताया कि 23 जगह पर फायर अलर्ट था, बारिश होने से अब किसी भी स्थान पर आग की सूचना नहीं है।
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