I-PAC Halts Work : इसमें कोई शक नहीं कि TMC बंगाल में सबसे मजबूत पार्टी है. वह लोकसभा और विधानसभा में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली पार्टी है. मगर इस बार का मुकाबला टेढ़ी खीर बनता जा रहा है. TMC की राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है.
बता दें, तमाम रेड झेलने के बाद आखिकार I-PAC ने अस्थाई तौर पर बंगाल से अपना बोरिया बिस्तर समेत लिया है और ऐसा उसने चुनाव से ऐन पहले किया है. बता दें I-PAC ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए राज्य में अपने सभी ओपरेशन रोक दिए हैं. I-PAC के ऐसा करने से राज्य में टीएमसी पर बेशक फर्क पड़ने जा रहा है, क्योंकि I-PAC टीएमसी की राजनीतिक सलाहकार थी.
राज्य में इस खबर ने खलबली मचा दी है. हर जगह इसे लेकर चर्चा चलने लगी है. कोई इसे ममता के ढलने का कारण बता रहा है तो कोई कह रहा है कि I-PAC ने जो काम करना था वो कर चुका है. बता दें I-PAC ने अपना यह निर्देश संगठन की तरफ से एक इंटरनल ईमेल के जरिये स्टाफ को पहले ही बता दिया गया है, जिसमें मुख्य रूप से कुछ खास कानूनी जिम्मेदारियों को ऑपरेशन रोकने का कारण बताया गया है.
कर्मचारियों को 20 दिन की अस्थाई छुट्टी
I-PAC प्रबंधन की तरफ से जारी किए गए निर्देश में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में अभी काम कर रहे सभी कर्मचारियों को तुरंत काम बंद करने और अगले 20 दिनों के लिए अस्थायी छुट्टी पर जाने का निर्देश दिया जाता है. प्रबंधन 11 मई के बाद कर्मचारियों से फिर से संपर्क करेगा. उस समय, स्थिति की समीक्षा की जाएगी, और आगे की रणनीति या अगले कदमों पर चर्चा की जाएगी.
I-PAC ने अपने कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में कहा है, “हमने हमेशा कानून का सम्मान किया है, और हम पूरी कानूनी प्रक्रिया में अपना पूरा सहयोग दे रहे हैं. हमें विश्वास है कि हमें सही समय पर न्याय मिलेगा.”
दबाव में I-PAC
बता दें, हाल फिलहाल में ED ने I-PAC के कई ठिकानों पर छापेमारी की है. इसमें दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में कंपनी के दफ्तरों पर कार्रवाई तो शामिल थी ही साथ में बंगाल में भी बीते समय छापेमारी की गई. कंपनी के को-फाउंडर और डायरेक्टर ऋषि राज सिंह के ठिकाने भी इस कार्रवाई के दायरे में आए.
I-PAC और उसके डायरेक्टर पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। इस मामले में CBI ने 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी। पूरा मामला करीब 2,742 करोड़ रुपए से जुड़ा है।
जानकार सूत्रों के मुताबिक, I-PAC का यह कदम हाल के कई राजनीतिक तनाव और सेंट्रल जांच एजेंसियों के लगातार दबाव की वजह से उठाया गया है.
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