सूरत स्टेशन पर उमड़ी प्रवासी मजदूरों की भीड़, मची भगदड़, नियंत्रण करने के लिए पुलिस का लाठीचार्ज

Stampede like Situation At Udhna Station

Stampede like Situation At Udhna Station : देश में मजदूर तबके के बीच एक असुरक्षा दिखनी शुरू हो गई है. Iran War से पैदा हुए ईंधन संकट का असर सबसे अधिक वर्किंग क्लास तबके के बीच देखने को मिला हिया. हाल में नॉएडा, करोल बाग और फरीदाबाद में श्रमिक वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर सड़कों पर दिखा तो आज सुबह गुजरात के उधना रेलवे स्टेशन पर 11.30 बजे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई.

मामले को नियंत्रण में लेने के लिए पुलिस और आरपीएफ को लाठियां बरसाईं. बता दें, यह भगदड़ तब ज्यादा बढ़ गई जब यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेनों में सीट पाने के लिए हजारों मजदूर एक साथ उमड़ पड़े. वे लाइन तोड़कर सीट हथियाना शुरू करने लगे, इतने में भगदड़ जैसी स्थिति देखने को मिली.

यह भगदड़ ठीक वैसी थी जैसी कुम्भ के समय नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर देखने को मिली. हालांकि किसी के हताहत होने की फिलहाल कोई खबर नहीं है.

Stampede like Situation At Udhna Station: सोशल मीडिया पर शेयर वीडियो

Stampede like Situation At Udhna Station
Stampede like Situation At Udhna Station (Source: Social media)

बता दें, गुजरात से अपने घर लौट रहे मजदूरों की यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर की जा रही है. जिसमें वे लोहे की जालियों पर चढ़कर कूदते नजर आ रहे हैं. तुर्रा यह कि इस दौरान गर्मी, प्यास और हताशा ने माहौल और तनावपूर्ण बना दिया है. कुछ ने इन मजदूरों एरियल शॉट लिया है, जिसमें देखा जा सकता है हजारों मजदूर भीड़ में इकठ्ठा हुए हैं.

कुछ क्लिप्स में देखा जा सकता ही मजदूर नारे लगाते रेलवे स्टेशन की तरफ बढ़ रहे हैं. मजदूरों के हाथों में तख्तियां दिखाई दे रही हैं. वहीँ भीड़ में छोटे छोटे बच्चे भी दिखाई दे रहे हैं जो सामान ढो रहे हैं.

Surat Udhna Station Crowd Lathicharge: वैश्विक उथलपुथल का असर

Surat Udhna Station Crowd Lathicharge
Surat Udhna Station Crowd Lathicharge (Source: Social media)

बता दें, निचले तबके में हालिया घटनाक्रमों के चलते सीधा प्रभाव देखने को मिला है. Iran War के चलते कई चीजों की कीमतों में भारी उछाल आया है. इसमें सबसे अधिक एलपीजी गैस की कमी सबसे बड़ा इशू रहा है, जिसने सीधे मजदूर तबके पर असर डाला है.

देश में यही हाल दिल्ली में भी देखा गया है जहां हजारों प्रवासी मजदूर मजबूरन घर लौट रहे हैं. वहीं समर वेकेशन की छुट्टियों ने भीड़ को और बढ़ा दिया.

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