16 Somvar Vrat Kaise Rakhe: सावन में किस दिन से शुरू करें 16 सोमवार व्रत? नोट करें सही समय, नियम और उद्यापन विधि

Summary :

हिंदू धर्म में 16 सोमवार व्रत का अत्यधिक महत्व है, जो भगवान शिव को समर्पित है। यह व्रत मनोवांछित जीवनसाथी, सुखी दांपत्य जीवन, संतान प्राप्ति, नौकरी में सफलता और अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए यह व्रत किया था। सावन के महीने में इस व्रत की शुरुआत करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है, क्योंकि यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। सावन मास में पड़ने वाले किसी भी सोमवार से 16 सोमवार व्रत शुरू करना शुभ होता है। इस साल 30 जुलाई के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार (3 अगस्त) से इसे शुरू किया जा सकता है।

16 Somvar Vrat Kaise Rakhe: हिंदू धर्म में 16 सोमवार व्रत का बहुत महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। अगर शादीशुदा जिंदगी में दिक्कतें आ रही हों, शादी में रुकावटें हों, मनपसंद जीवनसाथी चाहिए हो या संतान और नौकरी में सफलता पानी हो, तो 16 सोमवार का व्रत रखना बहुत अच्छा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए 16 सोमवार का व्रत रखा था। चूंकि, सावन के महीने को बहुत पवित्र माना जाता है और यह महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। यही वजह है कि 16 सोमवार व्रत की शुरुआत सावन में करना बहुत फलदाई होता है। माना जाता है कि सावन में व्रत और पूजा करने से भोलेनाथ बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। अगर आप भी इस बार सावन में 16 सोमवार व्रत की शुरुआत करने की सोच रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि सावन में यह व्रत कब शुरू करें? साथ जानें, 16 सोमवार व्रत की पूजा किस समय करनी चाहिए।

सोलह सोमवार व्रत कब से शुरू करें? (16 Somvar Vrat Kab Shuru Kare)

16 Somvar Vrat Kaise Rakhe
16 Somvar Vrat Kaise Rakhe (AI Generated)

सावन के महीने में पड़ने वाले किसी भी सोमवार से 16 सोमवार का व्रत शुरू करना सबसे शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल सावन का महीना गुरुवार, 30 जुलाई से शुरू हो रहा है और शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को खत्म होगा। अगर आप 16 सोमवार का व्रत शुरू करना चाहते हैं, तो 30 जुलाई के बाद पड़ने वाले सावन के पहले सोमवार (03, अगस्त) से इसे शुरू कर सकते हैं।

16 सोमवार पूजा का समय?

शिव पुराण के अनुसार, 16 सोमवार व्रत की पूजा दोपहर के बाद यानी शाम के 4 बजे के आसपास शुरू करनी चाहिए। शास्त्रों में माना गया है कि शाम के समय शिव जी की पूजा करने से सबसे बड़ा पुण्य मिलता है। ध्यान रहे, कि पूजा सूर्यास्त के पहले संपन्न हो जाए।

16 सोमवार व्रत की विधि (16 Somvar Vrat Kaise Rakhe)

16 Somvar Vrat Kaise Rakhe
16 Somvar Vrat Kaise Rakhe (AI Generated)
  • सावन के पहले सोमवार को जल्दी उठें। नहाने के पानी में थोड़े काले तिल मिलाकर स्नान करें।
  • स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और भगवान शिव के सामने मन ही मन पूरे 16 सोमवार तक व्रत रखने का संकल्प लें।
  • 16 सोमवार व्रत की पूजा शाम के समय करना बहुत शुभ होता है। हालांकि, ध्यान रहें कि आपकी पूजा सूरज ढलने से पहले पूरी हो जाए।
  • घर पर या पास के शिव मंदिर में सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाएं।
  • “ॐ नमः शिवाय” बोलते हुए शिवलिंग पर पंचामृत चढ़ाएं। इसके बाद सादे पानी और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • अब शिवलिंग पर सफेद चंदन लगाएं और बेलपत्र, धतूरा और भांग जैसी चीजें चढ़ाएं।
  • शिवजी के आगे धूप-दीपक जलाएं और उन्हें खीर का भोग लगाएं।
  • भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा भी जरूर करें। मां गौरी को सुहाग और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
  • इसके बाद शिव चालीसा पढ़ें। फिर भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और आखिरी में आरती करें।

16 सोमवार व्रत का उद्यापन

16 सोमवार के व्रत पूरे होने के बाद उनका ‘उद्यापन’ करना बहुत जरूरी होता है, तभी व्रत का पूरा फल मिलता है। 16 सोमवार पूरे होने के बाद 17वें सोमवार को 16 शादीशुदा जोड़ों को घर बुलाकर खाना खिलाएं और उन्हें दान-दक्षिणा दें। अगर 16 जोड़ों को बुलाना संभव न हो, तो आप 16 छोटी कन्याओं को भोजन करा सकते हैं या किसी ब्राह्मण को खाना खिलाकर दक्षिणा दे सकते हैं। 16 सोमवार के उद्यापन में भगवान शिव को गेहूं के आटे से बने चूरमे का भोग लगाया जाता है।

सावन में यह व्रत शुरू करने का महत्व

सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है, इसलिए इस महीने में 16 सोमवार का व्रत शुरू करना बहुत शुभ होता है। इस महीने में शिव जी की पूजा करने और उन पर जल चढ़ाने से भोलेनाथ की कृपा मिलती है और व्रत का कई गुना ज्यादा फल मिलता है। इस दौरान आसपास का माहौल भी भक्ति से भरा होता है। शादी, संतान, पारिवारिक सुख और नौकरी पाने के लिए सावन में यह व्रत शुरू कर ना बहुत फायदेमंद माना जाता है।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।