रांची की विशेष PMLA अदालत ने भूमि घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गुरुवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ( Hemant Soren) की न्यायिक हिरासत 4 अप्रैल तक बढ़ा दी है। 21 मार्च तक न्यायिक हिरासत में रहे सोरेन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। पिछले हफ्ते, रांची पुलिस ने ED अधिकारियों को नोटिस जारी किया था, जिसमें उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा दर्ज की गई FIR के संबंध में मार्च के तीसरे सप्ताह में जांच में शामिल होने के लिए कहा गया था।
- पूर्व CM हेमंत सोरेन की न्यायिक हिरासत 4 अप्रैल तक बढ़ा दी है
- 21 मार्च तक सोरेन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया
- पिछले हफ्ते, रांची पुलिस ने ED अधिकारियों को नोटिस जारी किया था
ED ने FIR के खिलाफ HC में याचिका दायर की थी
विकास की पुष्टि करते हुए, SSP रांची ने कहा, “एक नोटिस भेजा गया है। जांच अधिकारी इस बारे में अधिक जानकारी दे पाएंगे। वर्तमान में, वह कुछ मामलों के लिए स्टेशन से बाहर हैं।” ED ने FIR के खिलाफ झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसने ईडी अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया था। हेमंत सोरेन ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि ED ने उनकी छवि खराब करने के लिए 29 जनवरी को शांतिनिकेतन, दिल्ली स्थित उनके आवास और झारखंड भवन पर छापेमारी की। उन्होंने ईडी अधिकारियों पर आदिवासी होने के कारण उन्हें परेशान करने और उन्हें बदनाम करने का भी आरोप लगाया।
ST-SC एक्ट के तहत FIR दर्ज
उनकी शिकायत पर झारखंड पुलिस ने 31 जनवरी को ST-SC (PA) एक्ट की धारा 3(1) (पी) (आर)(एस) (यू) के तहत FIR दर्ज की। 29 फरवरी को झारखंड हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। 22 फरवरी को रांची की विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा उनकी याचिका खारिज करने के बाद सोरेन ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।


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