Dry Day During Elections: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसको देखते हुए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने दोनों राज्यों में वोटिंग पूरी होने तक अगले 48 घंटों के लिए ‘ड्राई डे’ लागू करने का निर्देश दिया है। एक आधिकारिक बयान में सोमवार को यह जानकारी दी गई।
Dry Day During Elections: मतदान से 48 घंटे पहले शराब बिक्री पर पूरी तरह रोक
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों का हवाला देते हुए, आयोग ने निर्देश दिया कि मतदान संपन्न होने से पहले के 48 घंटों के दौरान मतदान क्षेत्र के अन्दर किसी भी होटल, रेस्तरां, शराबखाना, दुकान या सार्वजनिक या निजी स्थान पर कोई भी मादक पेय बेचा, परोसा या वितरित नहीं किया जाएगा”।
अधिनियम की धारा 135सी के तहत जारी किया गया यह प्रतिबंध शराब रखने या बेचने का लाइसेंस रखने वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होगा, जिनमें क्लब, स्टार होटल और रेस्तरां शामिल हैं।
Election Commission of India: मतदान समाप्त होने तक ‘ड्राई डे’

चुनाव आयोग ने कहा है कि चुनाव के दौरान शराब परोसने की अनुमति नहीं होगी। कानून के अनुसार, मतदान खत्म होने से 48 घंटे पहले से लेकर मतदान समाप्त होने तक ‘ड्राई डे’ रहेगा। इस दौरान शराब की बिक्री और परोसने पर रोक होगी। यह नियम जरूरत पड़ने पर पुनर्मतदान के दिन भी लागू रहेगा।
Dry Days Liquor Ban: बिना लाइसेंस शराब भंडारण पर सख्ती
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे बिना लाइसेंस वाले परिसरों में शराब के भंडारण पर लगी सीमाओं को सख्ती से लागू करें। ड्राई डे का प्रावधान मतदान के हर चरण पर लागू होगा, जिसमें पुनर्मतदान भी शामिल है, और यह मतगणना के दिन 4 मई तक भी लागू रहेगा, जब इसी तरह के प्रतिबंध उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होंगे, जहां मतदान हुआ था।
West Bengal elections 2026: 23 और 29 अप्रैल को मतदान, 4 मई को मतगणना
आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुड्डुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा की, साथ ही छह राज्यों में उपचुनावों की भी घोषणा की। तमिलनाडु में मतदान और पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होना है, जबकि पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वोटों की गिनती 4 मई को होगी। यह निर्देश चुनाव आयोग के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसका उद्देश्य मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव को रोकना और मतदान प्रक्रिया के दौरान चुनावी निष्पक्षता बनाए रखना है।























