US Sea Drone Attack on Iran : सीजफायर की कोशिशें नाकाम होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब सीधे समुद्र में उतर आई है। Hormuz Strait पर वर्चस्व की इस लड़ाई में दोनों देश उन घातक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पहले कभी नहीं देखे गए।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने रविवार को ईरान के एक अहम सबमरीन और जहाज मेंटेनेंस सेंटर पर वन-वे अटैक ड्रोन से हमला किया। इसके तुरंत बाद, 13 जुलाई 2026 को अमेरिकी नौसेना ने पहली बार अपने सबसे आधुनिक ‘कोर्सेर’ सी-ड्रोन को जंग में उतारा। इस प्योर रोबोटिक ड्रोन ने ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले बंदर अब्बास नेवल बेस पर हमला कर रक्षा विश्लेषकों को चौंका दिया है।
बंदर अब्बास बेस पर कोर्सेर का कहर

अमेरिकी नौसेना का यह नया हथियार ‘कोर्सेर’ असल में पानी की सतह पर दौड़ने वाला एक प्योर रोबोटिक सुसाइड बोट है। लगभग 24 फीट लंबे इस सी-ड्रोन की रेंज 1,850 किलोमीटर से ज्यादा है और यह करीब 65 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है। यह ड्रोन लगभग 454 किलोग्राम वजनी बारूद ले जाने में सक्षम है। इसे रिमोट कंट्रोल से या फिर एआई और सेंसर्स की मदद से पूरी तरह ऑटोमैटिक तरीके से ऑपरेट किया जा सकता है।
सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ईरान के मेंटेनेंस बेस पर हुए हमले की पुष्टि की है। सेना के अनुसार, रविवार को हुए ड्रोन हमलों में ईरान की सबमरीन रिपेयर यूनिट को भारी नुकसान पहुंचा है। जवाब में ईरान भी पीछे नहीं हटा है। ईरानी सेना कतर, बहरीन, जॉर्डन और ओमान जैसे खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेसों को लगातार निशाना बना रही है।
सी-ड्रोन कैसे करते हैं काम?
सी-ड्रोन यानी अनमैन्ड सरफेस वेसल्स (USVs) ऐसी नावें होती हैं जिन्हें बिना किसी क्रू या नाविक के पानी की सतह पर चलाया जाता है। इनमें कैमरे, रडार और विस्फोटक फिट होते हैं।
ये तीन तरह से काम करते हैं, पहला कमांड सेंटर से रिमोट द्वारा, दूसरा पहले से तय रास्तों पर खुद चलने वाले सेमी-ऑटोनॉमस तरीके से, और तीसरा एआई तकनीक के जरिए पूरी तरह खुद फैसले लेने वाले फुल-ऑटोनॉमस सिस्टम पर।
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