Crude Oil price Impact On India: अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी के चलते भारतीय शेयर बाजार में कोहराम मच गया है। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है। ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव ठुकरा दिया है और नाकेबंदी जारी रखने का ऐलान किया जिसके बाद आज निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। बता दें कि शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत गुरुवार को गिरावट के साथ Sensex 1000 से अधिक अंको तक टूट गया है और निफ्टी में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं कच्चा तेल भी वर्ष 2022 के बाद सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
Brent Crude Price Record High

अमेरिका के साथ समझौते पर सहमत होने तक होर्मुज की नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहने के बयान पर वैश्विक स्तर पर हलचल मच गई है और ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से पार पहुंच गई। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है जिससे तेल आपूर्ति प्रभावित हो गई है और प्रस्ताव ठुकराने, नाकेबंदी के चलते वैश्विक स्तर तनाव बढ़ने की आशंका है। बताया जा रहा है कि विश्व अर्थव्यवस्था एक भयानक संकट से जूझने वाली है क्योंकि तेल सप्लाई ठप होने और कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बाद कई देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ने वाला है।
Stock Market Crash Today

शुरुआती कारोबार में बाजार में गिरावट का कारण ऑटो और पीएसयू बैंक कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी ऑटो और निफ्टी पीएसयू बैंक लूजर्स थे। लार्जकैप के साथ-साथ स्मॉलकैप और मिडकैप में गिरावट देखी गई। आज Sensex 1000 से अधिक अंको तक टूट गया है और निफ्टी में भी 300 अंको से अधिक भारी गिरावट दर्ज की गई है। जिससे निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपये डूब गए है। भारतीय बाजार के साथ ही एशियाई बाजारों में गिरावट के साथ कारोबार हो रहा था।
Rupee Record Low Today
आज वैश्विक तनाव का असर भारतीय रुपया पर भी पड़ा है और यह सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बता दें कि रुपया अब डॉलर के मुकाबले 95 के लेवल से नीचे गिर गया है और यह 95.21 डॉलर के करीब पहुंच गया है। पहली बार रुपया ने 95 का स्तर पार कर दिया है जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है।
Crude Oil price Impact On India
- वैश्विक तनाव के चलते विदेशी निवेशकों का भरोसा भी टूटा है जिससे वह बाजार से राशि निकाल रहे है और रुपया पर लगातार दबाव बनने के कारण टूट गया।
- ट्रंप के बयान के बाद आज बाजार में हलचल मची हुई है और कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया है।
- कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बाद शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई है। नाकेबंदी जारी रहने के बाद बाजार में दबाव बना हुआ है।
- डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी की एक वजह अमेरिकी फेड के फैसले को भी माना जा रहा है, जिसमें ब्याज दरों को 3.5 प्रतिशत से लेकर 3.75 प्रतिशत के बीच स्थिर रखा गया है। साथ ही मध्य पूर्व में तनाव के चलते महंगाई बढ़ रही है। जिससे डॉलर मजबूत हुआ है।
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) में बिकवाली जारी है और इक्विटी मार्केट में 2,468.42 करोड़ रुपए की निकासी की।























