Haryana News: हरियाणा विधानसभा में उस दिन का माहौल सामान्य नहीं था। सदन की हर आवाज, हर बातचीत एक खास दिशा की ओर इशारा कर रही थी। यह एक ऐसा अवसर था, जब चर्चा का केंद्र राजनीति नहीं, बल्कि समाज की आधी आबादी यानी महिलाओं का अधिकार और सम्मान था। विशेष सत्र की शुरुआत इसी भावना के साथ हुई कि अब समय आ गया है जब महिलाओं को उनका पूरा हक मिले। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जब अपने स्थान से उठे, तो उनके शब्दों में गंभीरता और स्पष्टता दोनों झलक रही थी। उन्होंने बिना किसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के सीधे मुद्दे पर बात की।
उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि उन महिलाओं के लिए है जो सालों से संघर्ष करती आई हैं। यह उन माताओं के लिए है जिन्होंने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए त्याग किया, और उन बेटियों के लिए है जो अपने अधिकारों के लिए आगे बढ़ रही हैं।
Haryana News: तीन बड़े विधेयक: महिला सशक्तिकरण की नई दिशा
16 अप्रैल 2026 का दिन महिला सशक्तिकरण के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस दिन केंद्र सरकार ने लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए, जिनका उद्देश्य महिलाओं को राजनीति में अधिक भागीदारी देना है।
- पहला विधेयक संविधान का 131वां संशोधन है, जिसके तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।यह कदम महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
- दूसरा विधेयक परिसीमन से जुड़ा है। इसका मकसद यह तय करना है कि आरक्षण को जमीन पर कैसे लागू किया जाएगा। यह विधेयक सुनिश्चित करता है कि आरक्षित सीटों का सही ढंग से निर्धारण हो सके।
- तीसरा विधेयक केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित है, जिससे यह व्यवस्था देश के हर हिस्से तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अगर सरकार जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया का इंतजार करती रहती, तो यह योजना लंबे समय तक टल सकती थी। लेकिन सरकार ने इस प्रक्रिया को तेज करने का फैसला लिया, ताकि आने वाले चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ सके।
“यह कानून नहीं, एक वादा है”
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में साफ कहा कि यह केवल एक कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि करोड़ों महिलाओं से किया गया एक वादा है। उन्होंने कहा कि यह कदम उन सभी महिलाओं के लिए है जो लंबे समय से अपने अधिकारों की प्रतीक्षा कर रही थीं। उनके अनुसार, जब महिलाओं को निर्णय लेने का अवसर मिलेगा, तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेज़ी से आएंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बेहतर नीतियां बन सकेंगी।
दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना: बेटियों को आर्थिक सहारा
सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अब तक कई किस्तें लाभार्थियों के खातों में भेजी जा चुकी हैं। यह योजना बेटियों और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। सबसे महत्वपूर्ण घोषणा यह रही कि इस योजना का लाभ लेने वाले परिवारों का बीपीएल कार्ड रद्द नहीं किया जाएगा। यह खबर उन परिवारों के लिए राहत लेकर आई, जो इस बात को लेकर चिंतित थे कि योजना का लाभ लेने से उनकी गरीबी की पहचान खत्म हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि गरीब परिवारों को दोनों तरह की सहायता मिलती रहेगी—योजना का लाभ भी और बीपीएल कार्ड की सुविधा भी।
ग्रुप-D कर्मचारियों के लिए प्रमोशन का मौका
सरकार ने इस विशेष सत्र में एक और बड़ा फैसला लिया। ग्रुप-D कर्मचारियों के लिए 30 प्रतिशत प्रमोशन कोटा तय किया गया है। यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे थे। इससे न केवल उनके करियर में सुधार होगा, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी बदलाव आएगा। सरकार का मानना है कि कर्मचारियों को आगे बढ़ने का मौका देने से उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ती है और प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होती है।
विपक्ष का अलग रुख: पार्किंग में विरोध
जहां एक ओर सदन के अंदर महिला सशक्तिकरण पर चर्चा चल रही थी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने अलग तरीका अपनाया। कुछ विपक्षी नेताओं ने विधानसभा परिसर की पार्किंग में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी। इस पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई और कहा कि यह सदन की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताया और कहा कि इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जब इतना महत्वपूर्ण विषय सदन में चर्चा के लिए रखा गया है, तब सभी सदस्यों को उसमें शामिल होना चाहिए था।
विपक्ष पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ नेता बाहर महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, लेकिन जब वास्तविक निर्णय लेने का समय आता है, तो वे पीछे हट जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन को लेकर लोगों के बीच भ्रम फैलाया गया, जबकि सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। उनके अनुसार, जनता अब इस तरह के विरोधाभासी रवैये को समझने लगी है और सही-गलत का फैसला खुद कर रही है।
सदन में भावुक अपील
अपने भाषण के अंत में मुख्यमंत्री का स्वर भावुक हो गया। उन्होंने सभी विधायकों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इस प्रस्ताव का समर्थन करें।उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि हर महिला का है। यह हर उस परिवार से जुड़ा है जहां बेटियां अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं। इस विशेष सत्र के बाद यह माना जा रहा है कि हरियाणा ने एक नई दिशा दिखाई है। जब देशभर में महिला आरक्षण को लेकर चर्चा चल रही है, तब राज्य ने ठोस कदम उठाकर एक उदाहरण पेश किया है।
सरकार के फैसले, महिला आरक्षण का समर्थन, आर्थिक योजनाएं, बीपीएल कार्ड की सुरक्षा और कर्मचारियों के लिए प्रमोशन, यह सब मिलकर एक व्यापक नीति का हिस्सा बनते हैं। यह संकेत देता है कि अगर सरकार की नीयत स्पष्ट हो, तो बड़े बदलाव संभव हैं। आने वाले समय में अन्य राज्य भी इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
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