Delimitation Bill 2026 : संसद में विशेष सत्र चल रहा है, जिसमें ख़ास यह है कि 3 विधेयकों पर चर्चा चलनी है. महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पहले ही समर्थन दे चुका है मगर असली रोड़ा बनने जा रहा है परिसीमिन बिल, जिस पर असली घमासान मचना है.
बता दें, 16, 17, 18 अप्रैल की तारीखों में संसद में विशेष सत्र चलेगा. इनमें सरकार की तरफ से लाए गए अहम् बिलों पर चर्चा चलनी है, जिसमें से महिला आरक्षण बिल, परिसीमन बिल और तीसरा केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक है.
इन तीनों बदलावों में से विपक्ष 2 बदलाओं पर समर्थन दे रहा है मगर परिसीमिन बिल पर विपक्ष कड़े विरोध के मूड में है. विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण के प्रति अपना संपूर्ण समर्थन दोहराने के साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि वह परिसीमन के प्रस्तावों का तगड़ा विरोध करेगा। इस एलान से स्पष्ट है कि विपक्ष की लगभग सभी पार्टियां प्रस्तावित 131वें संविधान संशोधन बिल में शामिल परिसीमन के प्रविधानों के खिलाफ एकजुट होकर संसद में वोट डालेंगी।
21 विपक्षी पार्टियों ने जताया विरोध
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि संसद सत्र शुरू होने से एक दिन पहले कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 21 विपक्षी पार्टियों के साथ बैठक की, और इस बैठक में राजनीतिक रूप से परिसीमन बिल का विरोध करने का फैसला लिया गया.
मल्लिकार्जुन खरगे ने महिला आरक्षण बिल से जुड़े संविधान संशोधन में ही परिसीमन प्रस्ताव शामिल किए जाने को सर्कार की राजनीतिक चालबाजी बताया, और कहा कि जिस तरह से यह बिल लाया जा रहा है हम उसके खिलाफ हैं.
क्या कहा राहुल गाँधी ने
संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र की पूर्व संध्या पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी बात रखी. उन्होंने वीडियो जारी करते हुए स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण का पूरी तरह समर्थन करती है, लेकिन सरकार की मंशा कुछ और है.
राहुल गांधी ने साफ किया कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण के. मुद्दे पर पूरी तरह समर्थन में है. उन्होंने याद दिलाया कि संसद ने 2023 में महिला आरक्षण बिल को सर्वसम्मति से पास किया था, जो अब संविधान का हिस्सा है. लेकिन मौजूदा प्रस्ताव का महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है.
परिसीमन से जुड़े प्रविधानों के विरोध के विपक्ष के एलान से स्पष्ट है कि वह 131वें संविधान संशोधन के खिलाफ वोट करेगा और ऐसे में विधेयक पारित कराने की राह बेहद मुश्किल होगी.
बिल पास कराने में होगी दिकत
हालांकि परिसीमन बिल को पास कराना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होने वाला है क्योंकि मौजूदा समय में लोकसभा में बिल पास कराने के लिए मौजूदा 543 या सदन में उपस्थित कुल सदस्यों के दो तिहाई बहुमत की जरूरत है यानि सरकार को 360 से अधिक सदस्यों का समर्थन चाहिए. इस समय उनके पास इतने सांसद नहीं है, एनडीए के पास लोकसभा में अभी कुल 293 सदस्य हैं और विपक्ष के समर्थन के बिना संविधान संशोधन पारित होना मुश्किल है.
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