आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिसने हमारे बहुत से कामों को आसान बना दिया है। पढ़ाई से लेकर हर क्षेत्र में इसकी मदद ली जा रही है। अब स्कूली बच्चे सिर्फ किताबी पढ़ाई ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीक के बारे में भी पढ़ेंगे। सरकार ने कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों के लिए एक नया सिलेबस तैयार किया है, ताकि बच्चे बचपन से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों को सीखकर आधुनिक दुनिया के साथ कदम मिला सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में स्कूलों में ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई का मिक्स मॉडल, यानी हाइब्रिड एजुकेशन (Hybrid Learning Model) एक सामान्य व्यवस्था बन सकती है।
कक्षा 3 से 8 तक के बच्चों पढ़ेंगे AI
सरकार ने स्कूली शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए कक्षा 3 से 8 तक के सिलेबस में बदलाव किया है। इसके तहत अब छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) की पढ़ाई कराई जाएगी। इसका बदलाव का उद्देश्य बच्चों को शुरुआत से ही आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों व अवसरों के लिए तैयार करना है।
नई शिक्षा नीति में तकनीकी पढ़ाई पर जोर

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में पढ़ाई के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर काफी जोर दिया गया है। सरकार पहले से ही दीक्षा, स्वयं और ई-पाठशाला जैसी वेबसाइट और ऐप्स के जरिए छात्रों और टीचरों को पढ़ाई का मुफ्त सामान दे रही है। इसके साथ ही, अब इंटरनेट और कंप्यूटर जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने, एक बड़ी नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी तैयार करने और आधुनिक टेक्नोलॉजी को पढ़ाई से जोड़ने के लिए कई नए कदम उठाए जा रहे हैं।
स्कूली पढ़ाई बनेगी आधुनिक
इस नए सिलेबस को लागू करने से पहले टीचरों को इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे बच्चों को आसान भाषा में AI और नई टेक्नोलॉजी के बारे में समझा सकें। इसके बाद स्कूलों में नई किताबों और पढ़ाई के नए तरीकों के साथ पूरी तरह शुरू किया जाएगा। सरकार का मानना है कि अगर बच्चों को बचपन से ही नई तकनीक के बारे में जानकारी दी जाएगी, तो वे आगे चलकर अपनी पढ़ाई, कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स और नौकरी के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। इससे उनको भविष्य में काफी मदद मिलेगा और वह आधुनिक AI की दुनिया में आसानी से घुल-मिल सकेंगे।
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