SC on Anurag Thakur Hate Speech Case : भाजपा नेता अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के कथित हेट स्पीच मामले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई CPI (M) की नेता वृंदा करात की याचिका को कोर्ट ने यह राय दी कि उक्त व्यक्तियों पर FIR दर्ज करने लायक कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता.
बता दें, इस मामले को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच सुन रही थी. अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री जिसमें कथित हेट स्पीच भी शामिल हैं, की जांच करने पर भाजपा नेताओं के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध बनता हुआ नहीं पाया गया. इसके साथ कोर्ट ने कहा कि बयान किसी विशेष समुदाय के खिलाफ निर्देशित नहीं थे.
क्या है मामला
दरअसल लेफ्ट नेता वृंदा करात की याचिका में दोनों नेताओं द्वारा दिए गए कई भाषणों का जिक्र किया गया. इनमें 27 जनवरी. 2020 को अनुराग ठाकुर द्वारा एक रैली में दिया गया वह घषण भी शामिल था जिसमें उन्होंने ‘देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को’ का नारा लगाया.
इसके बाद 27-28 जनवरी 2020 को प्रवेश वर्मा द्वारा दिए गए एक और भाषण का भी जिक्र किया गया. यह भाषण उन्होंने भाजपा के लिए चुनाव प्रचार करते समय और उसके बाद मीडिया को दिए गए एक इंटरव्यू में दिया था.
याचिका में यह आरोप लगाया की इन भाषणों के जरिए उन प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक हटाने की धमकी दी गई, जो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में शाहीन बाग़ में प्रदर्शन कर रहे थे.
साथ ही इन भाषणों का अमक्साद मुस्लिम समुदाय के लोगों के खिलाफ नफरत और दुश्मनी फैलाना था. इसके लिए उन्हें ऐसे हमलावरों के तौर पर पेश किया गया जो लोगों के घरों में घुसकर उनके साथ बालात्कार करेंगे और उनकी हत्या कर देंगे.
आदेश में दखल का ठोस आधार नहीं
लाइव ला के अनुसार, रिकॉर्ड की जांच करने के बाद जस्टिस विक्रम नाथ की अनुवाई वाली बेंच को हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं मिला. हालांकि बेंच ने हाईकोर्ट की उन्स टिप्पणी को गलत ठहराया जिसमें कहा गया की मजिस्ट्रेट द्वारा CrPC की धरा 156 (3) के तहत FIR दर्ज करने का आदेश देने से पहले ‘पूर्व मंजूरी’ लेना जरूरी होता है.
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि ये बयान किसी विशेष समुदाय के विरुद्ध निर्देशित नहीं थे, और न ही इन्होंने हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था को भड़काया.
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