West Bengal: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC ने शनिवार को भारतीय निर्वाचन आयोग ( ECI ) को पत्र लिखा। TMC ने पत्र के जरिए उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में शुक्रवार को सीबीआई और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की छापेमारी का विरोध किया।
Highlights:
- संदेशखाली मामले पर सीबीआई-एनएसजी कार्यवाई को लेकर TMC पहुंची चुनाव आयोग
- शिकायत में कहा – ‘इलेक्शन वाले दिन की गयी कार्यवाई’
- सीबीआई-एनएसजी ने शुक्रवार को ही थी संदेशखाली में कार्यवाई
बदनामी की नीयत से की गई कार्यवाई
टीएमसी ने कहा कि जब लोकसभा चुनाव का दूसरा चरण चल रहा था, तब केंद्रीय एजेंसियों ने राज्य की शासन और व्यवस्था को ‘बदनाम’ करने की नीयत से तलाशी स्थल पर हथियार रखे गए, ऐसा अंदेशा है। ECI को दी गई अपनी शिकायत में, तृणमूल कांग्रेस ने सीबीआई पर आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) की छवि खराब करने के लिए मतदान के दिन संदेशखाली में एक खाली स्थान पर छापेमारी करने का आरोप लगाया है। शिकायत की एक प्रति आईएएनएस के पास भी है।
We’ve written to @ECISVEEP bringing to their attention how, on the instructions of BJP, CBI and NSG carried out an unscrupulous raid at Sandeshkhali without issuing an actionable notice to the State Government or Police.
It’s about time the ECI stopped turning a blind eye to… pic.twitter.com/W1K5j62jWT
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) April 27, 2024
भारी मात्रा में बम और विस्फोटक की गई थी बरामद
बाद में एनएसजी के कमांडो भी उस तलाशी अभियान में सीबीआई अधिकारियों के साथ शामिल हो गए थे। सीबीआई ने शुक्रवार दोपहर एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन में संदेशखाली में निलंबित तृणमूल कांग्रेस नेता शेख शाहजहां के एक रिश्तेदार के आवास से भारी मात्रा में विदेशी और देसी हथियार, विस्फोटक और बम बरामद किए।
मतदान को प्रभावित करने के लिए भाजपा और केंद्र सरकार की सजिश
आयोग को लिखे पत्र में तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर नियमित रूप से तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया है। इसके साथ ही दोहराया कि राज्य सरकार के किसी भी प्रतिनिधि की गैरमौजूदगी में, हथियारों और गोला-बारूद की कथित बरामदगी। संभवतः भाजपा द्वारा छापेमारी स्थल पर हथियार रखने के लिए सीबीआई और एनएसजी के साथ साजिश के तहत रची गई एक चाल है।
यह फिर से देखना अप्रासंगिक नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार माना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


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