धनबाद, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। झारखंड के कोडरमा-धनबाद रेलखंड पर नकली साधुओं के एक गिरोह द्वारा दिए गए नशीले प्रसाद को खाने से उत्तर प्रदेश के मांडा की रहने वाली एक महिला यात्री की मौत हो गई। महिला अस्पताल में चार दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ी, लेकिन अंततः उसे बचाया नहीं जा सका।
इस सनसनीखेज वारदात के बाद रेल पुलिस ने घेराबंदी कर वाराणसी के रहने वाले सात नकली साधुओं को गिरफ्तार किया है। झारखंड के रेल डीजी अनिल पलटा को लगातार मिल रहे इनपुट्स के बाद जीआरपी और आरपीएफ की एक संयुक्त टीम गठित की गई थी। पुलिस ने विभिन्न रेलवे स्टेशनों के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों को खंगाला, जिसमें संदिग्धों की संदिग्ध गतिविधियां कैद हुई थीं।
पकड़े गए सातों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे वाराणसी और आसपास के इलाकों के रहने वाले हैं। वे अलग-अलग टुकड़ियों में बंटकर विभिन्न राज्यों की ट्रेनों, विशेषकर स्लीपर और जनरल बोगियों में यात्रियों को अपना निशाना बनाते थे। इस गिरोह के सदस्य साधु का भेष धारण कर खुद को किसी प्रतिष्ठित मठ से जुड़ा बताते हैं। ट्रेन में सफर के दौरान वे यात्रियों से मेल-जोल बढ़ाकर उनका विश्वास जीतते हैं और फिर ‘विशेष प्रसाद’ के नाम पर नशीला लड्डू थमा देते हैं।
मांडा की रहने वाली के साथ भी यही हुआ। लड्डू खाते ही वह अचेत हो गई, जिसके बाद लुटेरे उसकी नकदी और चांदी के गहने लेकर चंपत हो गए। पुलिस पूछताछ में यह उजागर हुआ कि यह एक संगठित सिंडिकेट है, जो साधु के भेष का इस्तेमाल केवल अपराध को छिपाने के लिए ‘कवर’ के तौर पर करता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने यात्रियों को अपना शिकार बनाया है और इनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली नशीली दवाओं का स्रोत क्या है।
रेल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यात्रा के दौरान किसी भी अपरिचित व्यक्ति, चाहे वह किसी भी भेष में हो, उसके द्वारा दिए गए प्रसाद या किसी भी खाद्य सामग्री को कतई स्वीकार न करें। धर्म और आस्था की आड़ में किसी अजनबी पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है।
–आईएएनएस
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