उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों 2027 से पहले राज्य की राजनीति में मुसलमानों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। ‘ऑल इंडिया मुस्लिम इमाम ऑर्गनाइज़ेशन’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को पत्र लिखकर बड़ी मांग की है। उन्होंने कहा है कि सपा पार्टी किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करे। उनका तर्क है कि चूंकि राज्य की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 22 प्रतिशत है, इसलिए मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी को मजबूत माना जाना चाहिए।
Maulana Shahabuddin Razvi Barelvi: मुस्लिम समर्थन को दें प्राथमिकता
Bareilly, Uttar Pradesh: National President of the All India Muslim Jamaat, Maulana Shahabuddin Razvi Bareilvi, says, “I have written a letter to Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav regarding the 2027 Uttar Pradesh Assembly elections. In the letter, I highlighted the sentiments… pic.twitter.com/YGZCGYvaOM
— IANS (@ians_india) June 22, 2026
अपने पत्र में मौलाना शहाबुद्दीन ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को समुदाय के योगदान की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि मुसलमान लंबे समय से समाजवादी पार्टी का समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के नेतृत्व मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव और परिवार के अन्य सदस्यों की चुनावी सफलता में मुस्लिम समुदाय ने अहम भूमिका निभाई है। इसलिए, अब मुस्लिम समुदाय नेतृत्व में अपनी हिस्सेदारी चाहता है।
Akhilesh Yadav under pressure: मुस्लिम चेहरे के साथ चुनाव लड़ने की सलाह
बरेलवी ने कहा कि समाजवादी पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसा करने से मुस्लिम समुदाय से भारी समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला मुसलमानों के सम्मान और राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक कदम साबित हो सकता है।
UP Assembly Election 2027: चुनाव से पहले होगा खेला?

मौलाना शहाबुद्दीन ने यह भी चेतावनी दी कि अगर समाजवादी पार्टी किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करती है, तो उसे मुस्लिम समर्थन में कमी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान सपा के लिए मुस्लिम समुदाय ने जो उत्साह दिखाया था, वैसा उत्साह 2027 में देखने को नहीं मिल सकता है। हालांकि, इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।























