Rainwater Harvesting System Mandatory in Delhi: राजधानी में बढ़ते जल संकट से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए पूरे शहर में वर्षा जल संचयन (रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू करने का फैसला किया है। इस संबंध में दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के 60 से अधिक विभागों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अब राजधानी के सभी सरकारी भवनों, पार्कों, आवासीय कॉलोनियों और संस्थागत परिसरों में मानसून से पहले कार्यशील वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करना अनिवार्य होगा। इस अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कैच द रेन, जहां गिरे, जब गिरे” अभियान के अनुरूप लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना है।
मानसून से पहले सभी विभागों को समयबद्ध टारगेट
मंत्री ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में पर्याप्त वर्षा होती है, लेकिन उसका प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता। हर वर्ष बारिश का पानी नालों के माध्यम से व्यर्थ बह जाता है। यदि इस पानी को जमीन में उतारा जाए तो भूजल स्तर बढ़ाया जा सकता है और गर्मियों में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सभी विभागों को समयबद्ध लक्ष्य दिए गए हैं। जिन सरकारी भवनों में वर्षा जल संचयन प्रणाली नहीं है, वहां तत्काल स्थापना की जाएगी और जहां पहले से मौजूद है, उन्हें मानसून से पूर्व पूरी तरह कार्यशील बनाया जाएगा।
जल बोर्ड देगा बिल में 10% की छूट
एक महत्वपूर्ण नीति निर्णय के तहत दिल्ली जल बोर्ड को अभियान के क्रियान्वयन और निगरानी की केंद्रीय जिम्मेदारी सौंपी गई है। बोर्ड स्थापना कार्य में सहयोग देने के साथ आर्थिक प्रोत्साहन भी प्रदान करेगा। जिन परिसरों में कार्यशील प्रणाली होगी, उन्हें जल बिल में 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी, जबकि नियमों का पालन न करने पर यह छूट वापस ली जा सकती है।
लागू की जाएगी वार्षिक स्व-घोषणा प्रणाली
मंत्री ने कहा कि अब तक भवन स्वीकृति के समय वर्षा जल संचयन अनिवार्य होने के बावजूद प्रभावी जांच नहीं होने से नियमों का पालन कमजोर रहा। अब नई निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसमें सत्यापन और जवाबदेही सुनिश्चित होगी ताकि व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे। इसके साथ ही वार्षिक स्व-घोषणा प्रणाली लागू की जाएगी, जिसके तहत संपत्ति मालिक प्रत्येक वर्ष प्रमाणित करेंगे कि उनका वर्षा जल संचयन तंत्र कार्यशील है। इससे निरंतर अनुपालन और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। सरकार बड़े आवासीय भूखंडों, समूह आवास सोसाइटियों और संस्थागत क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देगी, जहां भूजल पुनर्भरण की अधिक संभावनाएं हैं। साथ ही जल शक्ति केंद्रों के माध्यम से नागरिकों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा और प्रणाली स्थापना संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
बैठक के अंत में मंत्री ने कहा कि बारिश प्रकृति का अनमोल उपहार है और इसे व्यर्थ नहीं जाने दिया जा सकता। यदि सरकार, संस्थान और नागरिक मिलकर जिम्मेदारी निभाएं तो दिल्ली जल संकट से जल सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ सकती है। कड़ी निगरानी, आर्थिक प्रोत्साहन और विभागीय समन्वय के साथ राजधानी अब हर बूंद को संसाधन में बदलने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रही है।






















