ईरान से युद्ध में अमेरिका को लगा बड़ा झटका! सामने आए इन सबूतों ने खोली ट्रंप प्रसाशन की पोल, लगातार अफसर दे रहे इस्तीफे

Iran US War Big Update

Iran US War Big Update: ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच अमेरिका की सैन्य रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। हाल की घटनाओं से यह संकेत मिल रहा है कि अमेरिका को इस जंग में सफलता नहीं मिलती दिख रही है। इसी क्रम में बीते 25 दिनों में 4  बड़े सैन्य अधिकारियों को पद से हटाया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। ताजा मामला अमेरिकी नेवल सेक्रेटरी जॉन फेलन से जुड़ा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान की गतिविधियों को नियंत्रित करने में विफल रहने के बाद पेंटागन ने उन्हें पद से हटा दिया। फेलन करीब डेढ़ साल से इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे। उनसे पहले आर्मी चीफ जनरल रेंडी जॉर्ज, मेजर जनरल डेविड होंडले और मेजर जनरल विलियम ग्रीन जूनियर को भी हटाया जा चुका है। इन सभी अधिकारियों पर युद्ध में अपेक्षित नतीजे न देने का आरोप लगा था।

Iran US War Big Update: ट्रंप के करीबी माने जाते थे फेलन

रिपोर्ट्स के अनुसार, फेलन को डोनाल्ड ट्रंप का करीबी माना जाता था। दोनों को कई बार ट्रंप के निजी रिसॉर्ट मार-ए-लागो में साथ देखा गया है। यहां तक कि हाल ही में दोनों के बीच युद्ध को लेकर बातचीत भी हुई थी। इसके बावजूद रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने उन्हें पद से हटाने का फैसला लिया। फेलन पर यह भी आरोप था कि उन्होंने कमांड सिस्टम को नजरअंदाज किया और युद्ध में प्रभावी नेतृत्व नहीं दिखा पाए। हालांकि आधिकारिक बयान में इसे उनका स्वेच्छा से दिया गया इस्तीफा बताया गया है।

अमेरिका की रणनीति पर उठे सवाल

कई घटनाएं अमेरिका की कमजोर स्थिति की ओर इशारा करती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी जहाजों को रोकने में सफल नहीं हो पाया। एक दिन में करीब 34 ईरानी जहाज वहां से गुजर गए, जबकि सेंटकॉम का दावा है कि उसने वहां हजारों सैनिक तैनात कर रखे हैं। वहीं दूसरी वजह इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता भी नहीं हो पाई। ईरान ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद अमेरिका ने युद्धविराम (सीजफायर) को आगे बढ़ाने का फैसला लिया, जो उसकी कूटनीतिक कमजोरी को दर्शाता है।

तीसरा, ट्रंप प्रशासन इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है। इसका एक बड़ा कारण आने वाले चुनाव भी बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि लंबा खिंचता युद्ध राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए बिना ठोस बातचीत के ही सीजफायर बढ़ा दिया गया।

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